{"_id":"81182a40e63b718df36fc32e14c68022","slug":"road-maintenance-for-chhota-kailas-and-om-mountain","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब छोटा कैलास और ‘ऊँ’ पर्वत जाना होगा असान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब छोटा कैलास और ‘ऊँ’ पर्वत जाना होगा असान
कालिका रावल/कृष्णा गर्ब्याल, पिथौरागढ़/धारचूला
Updated Fri, 28 Feb 2014 11:03 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिथौरागढ़ जिले के ज्योलिंगकांग से चमोली जिले के मलारी तक सड़क निर्माण होने से छोटा कैलास और ‘ऊँ’ पर्वत के दर्शन आसान हो जाएंगे।
विज्ञापन
महत्वपूर्ण साबित होगी यह सड़क
साथ ही सामरिक लिहाज से भी 150 किमी लंबी यह सड़क महत्वपूर्ण साबित होगी। मुख्यमंत्री हरीश रावत की इस सीमांत जिले को गढ़वाल से जोड़ने की घोषणा यदि जल्द ही पूरी हुई तो धार्मिक के साथ-साथ साहसिक पर्यटन को भी पंख लगेंगे।
पढ़ें, छेड़छाड़ प्रकरणः ऐसे हुई थी हरक की युवती से मुलाकात
विज्ञापन
धारचूला के दौरे पर बुधवार को आए मुख्यमंत्री ने ज्योलिंगकांग से मलारी तक सड़क बनाने की घोषणा कर सीमांत जिले को गढ़वाल से जोड़ने की पहल की है। उन्होंने ज्योलिंगकांग से मलारी (चमोली) तक सड़क बनाने के लिए जल्द सर्वे कराने की भी बात कही है।
विज्ञापन
सबसे ऊंचाई वाली सड़कों में शुमार
ये सड़क देश की सबसे ऊंचाई वाली सड़कों में शुमार हो जाएगी। समुद्र तल से 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित छोटा कैलास के पास स्थित ज्योलिंगकांग से मलारी तक सड़क निर्माण का ऐलान कर मुख्यमंत्री ने यहां के लोगों के दिलों को छूने का भी काम किया।
पढ़ें, पंचायत में पद चाहिए तो मायके जाना होगा
धारचूला से 113 किमी दूर ज्योलिंगकांग से मलारी के लिए सड़क बनने से न केवल कुमाऊं और गढ़वाल का उच्च हिमालयी क्षेत्र यातायात सुविधा से जुड़ जाएगा, बल्कि साहसिक पर्यटन के साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी नए आयाम मिलेंगे।
पढ़ें, नागफनी, उत्तराखंड को बना सकती है धनी
इसी मार्ग पर नाभीढांग में विश्व विख्यात ‘ऊँ’ पर्वत है। इसके साथ ही छोटा कैलास के दर्शन करना भी आसान हो जाएगा। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की राह भी यह सड़क आसान करेगी।
पढ़ें, अब देहरादून से पहले ही रुक जाएंगी ट्रेन
इस सड़क के बनने से चीन और नेपाल की सीमा से सटे धारचूला और चमोली की दूरी में करीब 200 किमी कम हो जाएगी। धारचूला से वर्तमान में चमोली जाने के लिए 350 किमी की यात्रा करनी पड़ती है।
पढ़ें, 4 मई को खोले जाएंगे केदारनाथ मंदिर के कपाट
ज्योलिंगकांग से चमोली के लमारी तक सड़क निर्माण राज्य सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। मुख्यमंत्री इस मार्ग का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर कराना चाहते हैं। इससे कुमाऊं और गढ़वाल के विकास के द्वार खुलेंगे।
- हरीश धामी, विधायक, धारचूला