ऋषिकेश: जाखन नदी पर पुल निर्माण को लेकर धर्मसंकट में सरकार, नए पुल के लिए वन स्वीकृति नहीं
सरकार पुराने पुल को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नया पुल बनाने पर विचार कर रही है। क्योंकि नई जगह पर नए पुल के निर्माण के लिए भी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है।
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ऋषिकेश में जाखन नदी पर रानीपोखरी में बने पुल के टूट जाने से सरकार धर्मसंकट में फंस गई है। एक तरफ दून-ऋषिकेश के बीच यातायात बहाल करने की चुनौती है। वहीं दूसरी ओर टूटे पुल के पुनरोद्धार की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं। ऐसे में नए पुल का निर्माण करना पड़ेगा, लेकिन पुल निर्माण का जो प्रस्ताव पहले से मंजूर है वह वन स्वीकृतियां न मिलने के कारण लटका है।
अब सरकार पुराने पुल को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नया पुल बनाने पर विचार कर रही है। क्योंकि नई जगह पर नए पुल के निर्माण के लिए भी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है। इसके अलावा नया पुल टू लेन बने या फोर लेन शासन में इस पर भी मंथन शुरू हो गया है।
जाखन नदी पर बना जो पुल टूटा है, उसके बगल में ही नया पुल स्वीकृत है। केंद्रीय सड़क अवस्थापना निधि के अंतर्गत यहां 252 मीटर स्पान का पुल बनाया जाना है। इसके लिए केंद्रीय सड़क निधि से करीब 1411.18 लाख रुपये मंजूर हो गए थे। लेकिन, पुल निर्माण के स्थान पर करीब 81 हरे पेड़ खड़े हैं। वनभूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाने के कारण ये प्रस्ताव वन संरक्षक शिवालिक वृत्त देहरादून स्तर पर लंबित है।
डायवर्जन रोड बनाकर यातायात होगा बहाल
लोनिवि प्रमुख हरिओम शर्मा का कहना है कि पुल इस स्थिति में नहीं रह गया है कि उसे फिर से खड़ा किया जाए। पुल के छह पिलर पहले ही दिन टूट गए थे, जबकि दो पिलर शनिवार को ढह गए। उनका कहना है कि संभव है कि नया पुल पुराने को ध्वस्त कर ही बनाया जाए। पुल दो लेन का बनेगा या चार लेन का इस पर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है। फिलहाल आवाजाही के लिए नदी के ऊपर ही डायवर्जन रोड बनाकर ट्रैफिक को निकाला जाएगा।
जाखन नदी का जल स्तर कम होते ही बनेगा वैकल्पिक मार्ग
जाखन नदी का जलस्तर कम होते ही लोनिवि ऋषिकेश डिवीजन वैकल्पिक मार्ग बनाएगा। यहां नदी के ऊपर ही डायवर्जन बनाया जाएगा। इसके अलावा थानो-भोगपुर और घमंडपुर-अठूरवाला मार्ग को मार्ग को भी दुरुस्त किया जाएगा। अभी विभाग जाखन और बिदालना नदी का जलस्तर कम होने का इंतजार कर रहा है। नदी का जलस्तर कम होते ही प्राथमिकता के आधार पर रानीपोखरी में नदी में रास्ता बनाने काम किया जाएगा।
प्रमुख सचिव लोनिवि आरके सुधांशु ने कहा कि नए पुल का स्वरूप क्या होगा, इस बारे में भी अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। तमाम संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। नया पुल टू-लेन का होगा या फोर-लेन का, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इस पर भी मंथन किया जा रहा है। वहीं, पुराने पुल के टूटने के बारे में उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट का इंतजार है। पुल किन परिस्थितियों में टूटा उसके बाद ही स्पष्ट होगा।
खनन के कारण टूटा जाखन पुल : हरीश
पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि जाखन नदी पर बने पुल के ध्वस्त होने का कारण अवैध खनन हो सकता है। इसके अलावा सेफ्टी ऑडिट न कराया जाना भी एक वजह हो सकती है। अपनी फेसबुक पोस्ट में हरीश रावत ने लिखा कि उन्हें लगता है पुल खनन के कारण टूटा है। इसी तरीके से एक पुल पहले गौला में भी टूटा था। भाजपा राज में खनन का बोलबाला रहा है। इंजीनियर्स की जांच केवल आईवॉस न हो, इसलिए आवश्यक है कि किसी बाहरी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। यदि खनन इसका कारण निकलता है, तो जितने खनन पट्टे पुलों के नजदीक दिए गए हैं, उन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।