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पहाड़ में रेल, बस अब भूमि का है ‘खेल’
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 07 Feb 2016 02:04 PM IST
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उत्तराखंड सरकार यदि चाहे तो ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण शुरू हो सकता है। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में शनिवार को शासन और रेलवे अफसरों की बैठक में रेल लाइन के निर्माण से जुड़े पहलुओं पर चर्चा हुई। रेल विकास निगम के सीएमडी सतीश अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार के स्तर पर दो तीन औपचारिकताएं रह गईं हैं। यदि वे पूरी कर ली जाएं तो अप्रैल माह तक कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेल प्रोजेक्ट का काम वास्तविक रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
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अग्निहोत्री ने बताया कि चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले की लगभग 50.3 हेक्टेयर सरकारी राजस्व भूमि, रेल विकास निगम को हस्तांतरित होनी है। इनके प्रस्ताव संबंधित जिलाधिकारियों द्वारा राजस्व परिषद को भेज दिए गए हैं। लगभग 5.7 हेक्टेयर भूमि विभिन्न विभागों से भी हस्तांतरित होनी है। संबंधित जिलाधिकारियों से इनके लिए एनओसी प्राप्त होनी हैै।
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प्रथम फेज के लिए 64 हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट भूमि का प्रस्ताव देहरादून वन प्रभाग के तहत भेजा गया है। इसकी अनुमति रिजनल एम्पावर्ड कमेटी से प्राप्त होनी है। दूसरे फेज के तहत 5 वन प्रभागों में 244 हेक्टेयर वन भूमि स्वीकृति के प्रस्ताव भी ऑनलाइन कर दिए गए हैं। क्षेत्रीय कार्यालय से प्रोजेक्ट स्वीकृति की जानी है।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक राजस्व भूमि, रेल विकास निगम को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। रीजनल एम्पावर्ड कमेटी से वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति शीघ्र लिए जाने के प्रयास किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्णप्रयाग-ऋषिकेश रेल प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट है।
इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। भूमि हस्तांतरण, वन स्वीकृति सहित सभी मामलों में अविलंब कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सीएमडी से ऋषिकेश में एक अस्पताल की जिम्मेदारी सीएसआर के तहत लेने का अनुरोध किया। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव ओमप्रकाश, एस रामास्वामी सहित आला अफसर उपस्थित थे।