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बेटा साहब, पिता मांग रहे सरकारी राशन
चांद मोहम्मद / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 Nov 2015 01:09 PM IST
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बेटा सरकारी महकमे में बड़ा साहब है, लेकिन पिता सरकारी राशन चाहते हैं।
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हालत यह है कि वह राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (एपीएल) का कार्ड बनवाने के लिए विभाग के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। हद तो यह कि वह ऐसे अकेले व्यक्ति नहीं हैं। सरकारी राशन की चाहत में आजकल उन्हीं की तरह कई सक्षम लोग जिला आपूर्ति कार्यालय में देखने को मिल रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ आपूर्ति अधिकारी को काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है।
दरअसल, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के कार्ड बन जाने के बाद अक्तूबर माह से जनपद के दो लाख से ऊपर एपीएल कार्डों का नवीनीकरण किया जा रहा है। लेकिन जिसकी आय सालाना पांच लाख रुपये से अधिक है उसका राशन कार्ड नहीं बनाया जाएगा। राशन कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने से ऐसे लोग चिंतित हो गए हैं।
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रोजाना ऐसे दर्जनों लोग देहरादून स्थित जिला आपूर्ति कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जिनके परिवारों में एक-दो व्यक्ति सरकारी नौकरी में हैं या उनका कारोबार है। बता दें कि एपीएल के राशन कार्डों के नवीनीकरण का कार्य 31 दिसंबर तक पूरा होना है, लेकिन अभी तक केवल 30 प्रतिशत कार्डों का नवीनीकरण हो पाया है।
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केवल प्रमाण-पत्र के लिए चाहिए
सूत्रों की माने तो ऐसे रसूखदार एपीएल राशन कार्डों पर राशन नहीं लेते। घर में काम करने वाले नौकरों को राशन लेने के लिए कार्ड दे देते हैं। समय पड़ने पर राशन कार्ड का प्रयोग सिर्फ पते के प्रमाण पत्र के तौर पर करते हैं। विभागीय अफसरों के अनुसार सरकार की मंशा ऐसे अमीर कार्डधारकों के कार्ड निरस्त कर गरीबों को राज्य खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ना है।
अधिकतम पांच लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवारों को राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (एपीएल) में शामिल किया जाना है। पांच लाख से अधिक आय वाले परिवारों के कार्डों का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने पर रोजाना ऐसे दर्जनों लोग कार्यालय में बेवजह विभागीय कार्य में बाधा डाल समय बर्बाद कर रहे हैं।
- पीएस पांगती, जिला आपूर्ति अधिकारी, देहरादून