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Dehradun News: उत्तराखंड में भी उपलब्ध होंगे रियूजेबल पैड्स
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II- दोबारा उपयोग होने वाले इन पैड्स में नहीं होता कोई विषाक्त पदार्थI
सौख्यम रियूजेबल पैड्स की ओर से बृहस्पतिवार को एक निजी होटल में एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें, संस्था मैनेजिंग डायरेक्टर अंजू बिष्ट ने बताया कि अब उत्तराखंड में भी रियूजेबल (दोबारा उपयोग करने वाले पैड) मिलने लगेंगे। सैनिटरी नैपकिंस की तुलना में ये पैड बेहतर विकल्प हैं। इनमें कोई भी रासायनिक या विषाक्त पदार्थ नहीं होते और ये सस्ते भी होते हैं।
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Iअंजू बिष्ट को भारत की पैड वुमैन के नाम से भी जाना जाता है। अंजू ने सौख्यम रियूजेबल पैड्स की उपयोगिता के बारे में बताते हुए जैविक सामग्री से रियूजेबल पैड के बारे में जानकारी दी। यह केले के रेशे से बने हुए हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी बहुत कम रहेगा। अंजू बिष्ट ने डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड के दुष्प्रभावों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सौख्यम रियूजेबल पैड्स पिछले तीन साल से चलन में हैं जिसे करीब पांच लाख से अधिक महिलाओं ने इस्तेमाल किया है और डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड से इसका फर्क महसूस किया है। सौख्यम माता अमृतानंदमयी मठ जिन्हें प्रेम से अम्मा कहा जाता है यह उन्हीं की एक पहल का हिस्सा है। इस पहल की शुरुआत के पीछे का कारण लड़कियों और महिलाओं के स्वास्थ्य से तो जुड़ा ही है लेकिन इसके साथ ही ये पर्यावरण पर भी विशेष ध्यान देता है।
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I‘गांव की तीन हजार महिलाओं तक पहुंचेंगे ये पैड’
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Iपिछले साल सौख्यम रियूजेबल पैड्स को नीति आयोग की ओर से वीमेन ट्रांसफार्मिंग इंडिया अवार्ड भी मिला था। इसके साथ ही इसे मासिक धर्म स्वच्छता पर सर्वश्रेष्ठ सामाजिक पहल से भी नवाजा गया है। प्रवीण बिष्ट ने कहा कि सौख्यम की टीम ने उनके गोद लिए हुए गांवों की तीन हजार महिलाओं तक रियूजेबल पैड पहुंचाने के लिए रुपरेखा तैयार की है। हिमवैली फाउंडेशन से अनिता नौटियाल ने बताया कि इससे होने वाला बदलाव सालाना चार हजारा टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन को रोकने में मदद कर रहा है।I
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II- दोबारा उपयोग होने वाले इन पैड्स में नहीं होता कोई विषाक्त पदार्थI
सौख्यम रियूजेबल पैड्स की ओर से बृहस्पतिवार को एक निजी होटल में एक बैठक आयोजित की गई। जिसमें, संस्था मैनेजिंग डायरेक्टर अंजू बिष्ट ने बताया कि अब उत्तराखंड में भी रियूजेबल (दोबारा उपयोग करने वाले पैड) मिलने लगेंगे। सैनिटरी नैपकिंस की तुलना में ये पैड बेहतर विकल्प हैं। इनमें कोई भी रासायनिक या विषाक्त पदार्थ नहीं होते और ये सस्ते भी होते हैं।
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Iअंजू बिष्ट को भारत की पैड वुमैन के नाम से भी जाना जाता है। अंजू ने सौख्यम रियूजेबल पैड्स की उपयोगिता के बारे में बताते हुए जैविक सामग्री से रियूजेबल पैड के बारे में जानकारी दी। यह केले के रेशे से बने हुए हैं। इससे संक्रमण का खतरा भी बहुत कम रहेगा। अंजू बिष्ट ने डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड के दुष्प्रभावों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सौख्यम रियूजेबल पैड्स पिछले तीन साल से चलन में हैं जिसे करीब पांच लाख से अधिक महिलाओं ने इस्तेमाल किया है और डिस्पोजेबल सैनिटरी पैड से इसका फर्क महसूस किया है। सौख्यम माता अमृतानंदमयी मठ जिन्हें प्रेम से अम्मा कहा जाता है यह उन्हीं की एक पहल का हिस्सा है। इस पहल की शुरुआत के पीछे का कारण लड़कियों और महिलाओं के स्वास्थ्य से तो जुड़ा ही है लेकिन इसके साथ ही ये पर्यावरण पर भी विशेष ध्यान देता है।
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I‘गांव की तीन हजार महिलाओं तक पहुंचेंगे ये पैड’
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Iपिछले साल सौख्यम रियूजेबल पैड्स को नीति आयोग की ओर से वीमेन ट्रांसफार्मिंग इंडिया अवार्ड भी मिला था। इसके साथ ही इसे मासिक धर्म स्वच्छता पर सर्वश्रेष्ठ सामाजिक पहल से भी नवाजा गया है। प्रवीण बिष्ट ने कहा कि सौख्यम की टीम ने उनके गोद लिए हुए गांवों की तीन हजार महिलाओं तक रियूजेबल पैड पहुंचाने के लिए रुपरेखा तैयार की है। हिमवैली फाउंडेशन से अनिता नौटियाल ने बताया कि इससे होने वाला बदलाव सालाना चार हजारा टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन को रोकने में मदद कर रहा है।I
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