सही नहीं है छात्र आंदोलन पर पाबंदी
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पंकज गैरोला
नेहरू कॉलोनी, देहरादून।
देहरादून के एसएसपी कानून का डंडा लिए हर जगह अपराध पर नकेल कसने के लिए पहुंच जाते हैं, लेकिन ना जाने क्यों उन्हें अपने ही पुलिसकर्मियों का अपराध नजर नहीं आता।
बीते दिनों छात्रों ने डीएवी कॉलेज में पुलिसिया दमन के विरोध में आवाज मुखर कर प्रदर्शन किया तो पुलिस अपने कप्तान के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन को बड़े ही अलोकतान्त्रिक ढंग से कुचलने के लिए पहुंच गई।
चाटुकारिता के लिए कूदे पुलिसकर्मी
जबकि छात्र लोकतान्त्रिक तरीके से पुलिसिया दमन का विरोध कर रहे थे और उनके निशाने पर दून के एसएसपी केवल खुराना थे, शायद यही बात खाकी वर्दीधारी वालों को रास नहीं आई और एसएसपी की चाटुकारिता के लिए प्रदर्शन को कुचलने के लिए कूद पड़े।
दरअसल लोकतान्त्रिक प्रणाली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन होते आए हैं, फिर चाहे वह पुलिस की मनमानी के विरोध में हों या फिर किसी और मुद्दे पर।
नहीं है न्यायसंगत
डीएवी के छात्रों का विरोध न्यायसंगत भी था और तर्कसंगत भी फिर ना जाने क्यों पुलिस को यह रास नहीं आया।
पुलिस के उच्चाधिकारियों को इस मसले पर एसएसपी से जवाब तलब कर मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए ताकि लोकतान्त्रिक प्रणाली मजबूत बनी रहे और भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न घटे। पुलिस के द्वारा छात्रों के प्रदर्शन को कुचलना अशोभनीय और अधिकारों का हनन ही कहलाया जाएगा न कि बहादुरी।