{"_id":"62fbe685c7a13f3298699167","slug":"resolve-to-give-world-class-recognition-to-the-products-of-the-state-city-news-drn420106161","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड की हरियाली और खुशहाली का संकल्प लेकर धाद का हरेला घी संग्रांद संपन्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड की हरियाली और खुशहाली का संकल्प लेकर धाद का हरेला घी संग्रांद संपन्न
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धाद की पहल और अमर उजाला के मीडिया सहयोग के साथ हरेला घी संग्रांद का एक माह तक आयोजित अभियान अमर उजाला सभागार में संवाद के साथ समाप्त हुआ। संवाद में एक माह तक अभियान के विभिन्न विषयों पर काम करने वाले साथियों ने शिरकत की। इस दौरान उत्तराखंड की हरियाली और खुशहाली का तो संकल्प लिया गया, साथ ही उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों, व्यंजनों को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प भी लिया गया।
अमर उजाला के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में धाद के सचिव तन्मय मंमगाई ने बताया कि उत्तराखंड की हरियाली और खुशहाली के निमित्त हरेला घी संग्रांद का कार्यक्रम 12 वर्षों से शासन और समाज के कई वर्गों के बीच आयोजित किया जा रहा, जिसमें उत्तराखंड की लोक परंपराओं के साथ समाज को जोड़ने के साथ उनके आधुनिक संदर्भ को लोगों तक ले जाया जाता है। संवाद में वरिष्ठ भूगर्भशास्त्री उत्तम सिंह रावत ने कहा कि हरेला को अब पुन: गांव तक ले जाना होगा, जिससे उत्तराखंड में जो पलायन की समस्या खड़ी हो गई है, वह रुक सके। इसके लिए हमें खेती, अन्न के सवालों को हल करने के लिए आगे आना होगा। इसके साथ ही पौधरोपण को अब सड़कों के किनारे और सूख रहे जलस्रोतों के इर्द गिर्द पहुंचाना होगा।
स्मृतिवन मालदेवता में पौधरोपण की जानकारी देते हुए सचिव नीना रावत ने बताया कि धाद ने इस तर्ज पर स्मृतिवन को विकसित किया है कि लोग पौधों को रोपित करने के साथ उनके साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाए रखे और उसकी देखभाल कर रहें। इसके चलते आज वहां लगभग 250 वृक्षों का वन बन रहा है। फंची के संयोजक किशन सिंह ने कहा कि इस माह पौधा लगाने के साथ जो एक अन्य विषय हम समाज में ले गए, यह विषय पहाड़ के अन्न और भोजन का है। इस दिशा में गत दो वर्षों से एक संगठित पहल फंची के साथ हुई, जिसमें हम एक सामाजिक प्रयोग कर रहे हैं। कल्यो की संयोजक मंजू काला ने कहा कि पहाड़ के अन्न और भोजन में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय होने के क्षमता है। बशर्ते उसके कलेवर और प्रस्तुति पर निरंतर काम किया जाय। इस दिशा में धाद ने हर माह कल्यो फूड फेस्टिवल के आयोजन का प्रयोग किया, जो काफी कामयाब रहा है।
विज्ञापन
आशा डोभाल ने कहा कि हरेला घी संग्रांद के विचार को नई पीढ़ी तक ले जाने पर अभियान का विशेष फोकस रहा, जिसमें शहर और प्रदेश के कई स्कूलों में पौधरोपण संग उन्हें पहाड़ के अन्न भोजन को शामिल करने को प्रेरित किया गया। श्रीगुरुराम राय के प्राचार्य विनय आनंद बौड़ाई ने कहा कि उचित बाजार के अभाव में पहाड़ की खेती का निरंतर ह्रास हुआ है। पहाड़ के अन्न के वास्तविक अर्थशास्त्र को विकसित करने को उसके उपभोग के लोकप्रिय तरीके खोजने होंगे। इस मौके पर पूर्व सैनिक महावीर रावत, हरेला के केंद्रीय संयोजक साकेत रावत, मित्रवन के संयोजक मनोहर लाल, स्मृति वन के सह संयोजक इंदु भूषण सकलानी, विनोद कुमार शुभम शर्मा आदि ने भी विचार रखे।
हरेला में पौधरोपण संग विशेष अध्याय जुड़ा
ट्रीज ऑफ दून के संयोजक हिमांशु आहूजा ने बताया कि अबकी हरेला में पौधरोपण के साथ एक विशेष अध्याय जुड़ा। वह था शहर के बुजुर्ग और पुराने पेड़ों के प्रति लोगों को संवेदनशील करने की यात्रा। इस यात्रा के साथ शहर के उन पुराने पेड़ों की खोज और पड़ताल का अभियान शुरू हो गया है, जो कई कोनों में शहर को बरसों से हरियाली, छांव और हवा को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।
प्रदेश संग देश के अन्य हिस्सों में हरेला पहुंचा
हरेला भारत के संयोजक गणेश चंद्र उनियाल ने कहा कि अबकी हरेला को देहरादून और उत्तराखंड के इतर देश के अन्य स्थानों में ले जाने की पहल हुई है, जिसमें बीकानेर, हैदराबाद, दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे के साथ देश के कई स्थानों पर इसका आयोजन हुआ। साथ ही अबकी व्यक्तिगत रूप से विदेशों में इसके आयोजन के साथ संस्थागत रूप से ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में उत्तराखंडी मूल के लोगों ने आयोजन किया।
सोशल मीडिया में भी हरेला छाया रहा
सोशल मीडिया का पक्ष रखते हुए बिमल रतूड़ी ने कहा कि अभियान ने जमीन के अलावा सोशल मीडिया पर भी धमक कायम रखी है। इसमें बड़ी जन भागीदारी हासिल हुई। बताया कि धाद के प्रयोग एक तरह की उद्यमशीलता विकसित करने के साथ हो रहे है। उन्होंने चारधाम यात्रा रूट में पहाड़ के अन्न उत्पाद के विधिवत प्रदर्शन और विपणन की वकालत की।
विज्ञापन
अमर उजाला के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में धाद के सचिव तन्मय मंमगाई ने बताया कि उत्तराखंड की हरियाली और खुशहाली के निमित्त हरेला घी संग्रांद का कार्यक्रम 12 वर्षों से शासन और समाज के कई वर्गों के बीच आयोजित किया जा रहा, जिसमें उत्तराखंड की लोक परंपराओं के साथ समाज को जोड़ने के साथ उनके आधुनिक संदर्भ को लोगों तक ले जाया जाता है। संवाद में वरिष्ठ भूगर्भशास्त्री उत्तम सिंह रावत ने कहा कि हरेला को अब पुन: गांव तक ले जाना होगा, जिससे उत्तराखंड में जो पलायन की समस्या खड़ी हो गई है, वह रुक सके। इसके लिए हमें खेती, अन्न के सवालों को हल करने के लिए आगे आना होगा। इसके साथ ही पौधरोपण को अब सड़कों के किनारे और सूख रहे जलस्रोतों के इर्द गिर्द पहुंचाना होगा।
विज्ञापन
स्मृतिवन मालदेवता में पौधरोपण की जानकारी देते हुए सचिव नीना रावत ने बताया कि धाद ने इस तर्ज पर स्मृतिवन को विकसित किया है कि लोग पौधों को रोपित करने के साथ उनके साथ एक भावनात्मक रिश्ता बनाए रखे और उसकी देखभाल कर रहें। इसके चलते आज वहां लगभग 250 वृक्षों का वन बन रहा है। फंची के संयोजक किशन सिंह ने कहा कि इस माह पौधा लगाने के साथ जो एक अन्य विषय हम समाज में ले गए, यह विषय पहाड़ के अन्न और भोजन का है। इस दिशा में गत दो वर्षों से एक संगठित पहल फंची के साथ हुई, जिसमें हम एक सामाजिक प्रयोग कर रहे हैं। कल्यो की संयोजक मंजू काला ने कहा कि पहाड़ के अन्न और भोजन में राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय होने के क्षमता है। बशर्ते उसके कलेवर और प्रस्तुति पर निरंतर काम किया जाय। इस दिशा में धाद ने हर माह कल्यो फूड फेस्टिवल के आयोजन का प्रयोग किया, जो काफी कामयाब रहा है।
विज्ञापन
आशा डोभाल ने कहा कि हरेला घी संग्रांद के विचार को नई पीढ़ी तक ले जाने पर अभियान का विशेष फोकस रहा, जिसमें शहर और प्रदेश के कई स्कूलों में पौधरोपण संग उन्हें पहाड़ के अन्न भोजन को शामिल करने को प्रेरित किया गया। श्रीगुरुराम राय के प्राचार्य विनय आनंद बौड़ाई ने कहा कि उचित बाजार के अभाव में पहाड़ की खेती का निरंतर ह्रास हुआ है। पहाड़ के अन्न के वास्तविक अर्थशास्त्र को विकसित करने को उसके उपभोग के लोकप्रिय तरीके खोजने होंगे। इस मौके पर पूर्व सैनिक महावीर रावत, हरेला के केंद्रीय संयोजक साकेत रावत, मित्रवन के संयोजक मनोहर लाल, स्मृति वन के सह संयोजक इंदु भूषण सकलानी, विनोद कुमार शुभम शर्मा आदि ने भी विचार रखे।
हरेला में पौधरोपण संग विशेष अध्याय जुड़ा
ट्रीज ऑफ दून के संयोजक हिमांशु आहूजा ने बताया कि अबकी हरेला में पौधरोपण के साथ एक विशेष अध्याय जुड़ा। वह था शहर के बुजुर्ग और पुराने पेड़ों के प्रति लोगों को संवेदनशील करने की यात्रा। इस यात्रा के साथ शहर के उन पुराने पेड़ों की खोज और पड़ताल का अभियान शुरू हो गया है, जो कई कोनों में शहर को बरसों से हरियाली, छांव और हवा को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।
प्रदेश संग देश के अन्य हिस्सों में हरेला पहुंचा
हरेला भारत के संयोजक गणेश चंद्र उनियाल ने कहा कि अबकी हरेला को देहरादून और उत्तराखंड के इतर देश के अन्य स्थानों में ले जाने की पहल हुई है, जिसमें बीकानेर, हैदराबाद, दिल्ली, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे के साथ देश के कई स्थानों पर इसका आयोजन हुआ। साथ ही अबकी व्यक्तिगत रूप से विदेशों में इसके आयोजन के साथ संस्थागत रूप से ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में उत्तराखंडी मूल के लोगों ने आयोजन किया।
सोशल मीडिया में भी हरेला छाया रहा
सोशल मीडिया का पक्ष रखते हुए बिमल रतूड़ी ने कहा कि अभियान ने जमीन के अलावा सोशल मीडिया पर भी धमक कायम रखी है। इसमें बड़ी जन भागीदारी हासिल हुई। बताया कि धाद के प्रयोग एक तरह की उद्यमशीलता विकसित करने के साथ हो रहे है। उन्होंने चारधाम यात्रा रूट में पहाड़ के अन्न उत्पाद के विधिवत प्रदर्शन और विपणन की वकालत की।