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यहां आकर मेहमान परिंदों से करें अठखेलियां
विमल शर्मा/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 26 Nov 2013 04:04 PM IST
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साइबेरिया से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवासी पक्षी उत्तराखंड के जलाशयों में पहुंचने लगे हैं। इस वीकेंड आप इनके साथ छुट्टियां गुजार कर एक अनोखे अनुभव का आनंद ले सकते हैं।
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कलरव से जलाशय गुंजायमान
सूरज की किरणों के साथ ही मेहमान पक्षियों के कलरव से जलाशय गुंजायमान हैं। मन को मोह लेने वाले यह आकर्षक मेहमान मार्च तक यहां कलरव करेंगे। साइबेरिया में अत्यधिक बर्फबारी के चलते प्रतिवर्ष मेहमान पक्षी उत्तराखंड स्थित जलाशयों की ओर रुख करते हैं।
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मेहमान पक्षियों के प्रजनन के लिए यहां का वातावरण अनुकूल होता है। सुबह सूर्य की किरणों के साथ झुंड के रूप में भोजन की तलाश में डुबकी लगाने के दौरान इनका कलरव और क्रीड़ा देख मन रोमांचित हो जाता है।
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लद्दाख और कश्मीर की ऊंचाइयों को नापते है मेहमान
आईएफएस डॉ. पराग मधुकर धकाते बताते है कि साइबेरियन पक्षी लद्दाख और कश्मीर की ऊंचाइयों को नापते हुए ट्रांस हिमालयन पार कर तराई समेत अन्य जलाशयों की सीमा में पहुंचते हैं। उनके मिजाज के अनुरूप मौसम व भोजन पर्याप्त मात्रा में मिल जाता है।
मेहमान पक्षी देहरादून के विकासनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर केहरिपुरा, नानकसागर, शारदा कैनाल, नानक सागर, बैगुल डैम सहित अन्य जगहों पर इन दिनों आकर्षक का केंद्र बने हुए हैं।
46 पक्षियों की प्रजाति आती है यहां
साइबेरिया से करीब 46 पक्षियों की प्रजातियां यहां का रुख करती हैं। इनमें लाल सिर वाली बत्तख नीले सिर बाली बत्तख, सुरखाब, विंटेल आदि प्रमुख हैं। जलाशयों में ऊंचाई से डुबकी लगान इन्हें खूब भाता है। इनका मुख्य भोजन छोटी मछलियां, कीट, जलाशयों के अंदर उगने वाली नरम पौध आदि होता है। राज्य का मौसम इनके प्रजनन के लिए अनुकूल होता है।
धड़ल्ले से होता है शिकार
प्रतिबंध के बावजूद इन पक्षियों का शिकार धड़ल्ले से किया जाता है। वन विभाग की ओर से इनके शिकार को रोकने के लिए टीम भी गठित की जाती है। बावजूद इसके चोरी, छिपे शिकार होता है। मध्य मार्च में गरमी शुरू होते ही खट्टी मीठी यादों के साथ मेहमान पक्षी अपने देश को रवाना हो जाते हैं।