राजपथ पर दिखेंगे उत्तराखंड के पिता-पुत्री एक साथ
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एक ही परिवार को ऐसा गौरव बिरले ही हासिल होता है। एक ओर फौज में अफसर बिटिया गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली के राजपथ पर कदमताल कर रही होगी तो दूसरी ओर पूर्व फौजी पिता अपनी टोली के साथ अपना दम दिखा रहे होंगे।
ऐसे सौभाग्यशाली शख्स हैं देहरादून के आनरेरी कैप्टन मेहरबान सिंह भंडारी। कैप्टन भंडारी 26 जनवरी को परेड में पूर्व सैनिकों की टुकड़ी में शामिल हैं जो दुनिया को भारतीय रणबांकुरों का कौशल दिखाएगी।
उल्लेखनीय है कि दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्राध्यक्ष अमेरिकी प्रेसिडेंट बराक ओबामा इस कार्यक्रम के मुख्य मेहमान हैं। कैप्टन भंडारी की बेटी नीलम भंडारी सेना के इंजीनियर कोर में बतौर कैप्टन के तौर पर शामिल है। नीलम महिला अधिकारियों की टीम में परेड में शामिल हो रही है।
गणतंत्र दिवस की परेड में पहली बार गढ़वाल के पांच पूर्व सैनिक भी हिस्सा लेंगे। गढ़वाल राइफल्स के पांचों पूर्व सैनिकों ने लैंसडौन में पूर्व अभ्यास किया और बृहस्पतिवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।
गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के राजपथ पर होने वाली परेड में देशभर से 60 पूर्व सैनिक शामिल होते हैं। इस टुकड़ी में इस बार गढ़वाल से पांच पूर्व सैनिकों को शामिल किया गया है। यह पहला मौका है जब गढ़वाल से पांच पूर्व सैनिक इस परेड का हिस्सा बन रहे हैं।
पांचों पूर्व सैनिक काफी उत्साहित हैं। इनमें देहरादून के आनरेरी कैप्टन जयपाल सिंह रावत, देहरादून के ही सूबेदार मेहरबान सिंह भंडारी, कोटद्वार भाबर के सूबेदार सोहन सिंह, एकेश्वर ब्लाक पौड़ी गढ़वाल के नायक ताजबर सिंह और एकेश्वर के ही नायक मनमोहन सिंह शामिल हैं।
मजदूर की ‘तोप’ बेटी ने सबको चटाई धूल
बीना मजदूर की बेटी है। जाहिर है, संघर्ष में तपी है। मार्शल आर्ट की खिलाड़ी है। दमखम और तेवर इतना कि अन्य प्रतिस्पर्धी उसे तोप की संज्ञा देते हैं। बीना ने 60वीं राष्ट्रीय विद्यालयी खेलों की च्वाइक्वांडो मार्शल आर्ट प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में अपने प्रतिद्वंद्वियों को धूल चटाकर सोना जीता। बीना बाक्सिंग में भी राज्य स्तर पर चैंपियन रह चुकी हैं। इसी साल की हल्द्वानी में हुई बाक्सिंग प्रतियोगिता में उसने गोल्ड जीता था।
बेटी ने जीता सोना
मजदूर की बेटी बीना ने राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर अपना और राज्य का नाम रोशन किया है। बीना ने 60वीं राष्ट्रीय विद्यालयी स्कूल खेलों की च्वाइक्वांडो मार्शल आर्ट प्रतियोगिता के सीनियर वर्ग में स्वर्ण झटकर पहला स्थान हासिल किया।
जीआईसी कुंभीचौड़ में 12वीं की छात्रा बीना के पिता सते सिंह मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। मार्शल आर्ट के अभ्यास के लिए उसे किस तरह से संसाधनों से जूझना पड़ता होगा इसे आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन कड़ी मेहनत और लगन ने उसे बेहतर खिलाड़ी बना दिया।
उत्तराखंड ने तीसरा स्थान प्राप्त किया
12 से 16 जनवरी तक छत्तीसगढ़ के दुर्ग में सीनियर च्वाइक्वांडो मार्शल आर्ट प्रतियोगिता संपन्न हुई। 69 किलोभार वर्ग में खेलते हुए बीना के पंच के आगे कोई खिलाड़ी टिक नहीं पाया। उसने गुजरात, हरियाणा और दिल्ली की खिलाड़ियों धूल चटाते हुए गोल्ड पर कब्जा किया।
बीना की च्वाइक्वांडो कोच और प्रतियोगिता के निर्णायक के तौर पर गई मीनाक्षी ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर च्वाइक्वांडो में उत्तराखंड ने सात पदकों के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रतियोगिता में देश की कुल 31 टीमों ने प्रतिभाग किया था। विद्यालय के व्यायाम शिक्षक सुनील रावत ने बताया कि हमारी टीम ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपने पूर्व के प्रदर्शन को दोहराया है। प्रदेश ने लगातार तीसरी बार तीसरा स्थान हासिल किया है। टीम के साथ पौड़ी के व्यायाम शिक्षक वर्षा, मैनेजर के तौर पर चंपावत के डा. हरिशंकर गहतोड़ी, बालिका कोच सुनील मिश्रा भी गए थे।
यह रहे उत्तराखंड के पदक
मीनाक्षी के अनुसार चंपावत की दीपा खर्कवाल ने भी स्वर्ण पदक जीता है। पिथौरागढ़ के अतुल काकी ने रजत, बागेश्वर के तुलसी रौतेला और राजीव कुमार, चंपावत की रेनू, अनिल बिष्ट ने कांस्य पदक जीता है।
बाक्सिंग में भी जीत चुकी है गोल्ड
- बीना च्वाइक्वांडो ही नहीं बल्कि बाक्सिंग में भी राज्य स्तर पर चैंपियन रह चुकी हैं। इसी साल की हल्द्वानी में हुई बाक्सिंग प्रतियोगिता में उसने गोल्ड जीता था।
‘तोप’ रखा नाम
- राष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिता में रिंग में उतरी तो उसके प्रहारों को देखकर वहां सभी प्रभावित हो गए। जोरदार पंचों के प्रहार को देखते हुए वहां पर उसे तोप नाम से बुलाने लगे। पूरी प्रतियोगिता में उसका यही नाम पड़ गया।