{"_id":"e5adc438ca8cf7cbd85058a3aeeb1697","slug":"renovation-in-kedarnath-dham-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केदारनाथ: मंदिर के द्वार से मंडप तक होगा पुनरुद्धार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केदारनाथ: मंदिर के द्वार से मंडप तक होगा पुनरुद्धार
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 30 Apr 2015 02:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदारनाथ मंदिर में संरक्षण कार्य का ब्लूप्रिंट तैयार हो गया है। इसके पश्चिमी और पूर्वी द्वारों के साथ ही मुख्य मंडप की दीवारों तक का पुनरुद्धार होगा।
विज्ञापन
आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए द्वारों से निकले पत्थरों की जगह नए पत्थरों को रिसेट किया जाएगा। मंदिर की दीवार को भी रिसेट किया जाना है। इसके लिए तराशे गए पत्थरों का कुछ स्टाक तैयार है। कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दून सर्किल की टीम इसी 5 मई को केदारनाथ रवाना हो जाएगी। 10 मई से कार्य प्रारंभ हो जाने की संभावना है।
विज्ञापन
इस सीजन में कार्य के लिए तकरीबन तीन माह का समय होगा। सूत्रों के मुताबिक संरक्षण कार्य के लिए 75 से 80 लाख का खर्च होगा। इसका प्रस्ताव एएसआई के नई दिल्ली स्थित महानिदेशक कार्यालय को भेजा जा चुका है।
विज्ञापन
इसे हरी झंडी मिलने की पूरी संभावना है। एएसआई की इस कार्य के संबंध में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वैज्ञानिक शाखा से भी बात हुई है। इस शाखा के विशेषज्ञों को मंदिर के रासायनिक संरक्षण का कार्य करना है।
भूकंप से खतरा तो नहीं केदारनाथ मंदिर को...
केदारनाथ मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में पड़ता है। इस जिले को भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन-5 में रखा गया है। मंदिर में होने वाले पुनरुद्धार और संरक्षण कार्य में इस संवेदनशील बिंदु का भी ध्यान रखा जाएगा।
एएसआई अपना कार्य करते वक्त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी चेन्नई के सुझावों पर भी अमल करेगी। आईआईटी के विशेषज्ञ ही मंदिर की स्टेबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इससे यह पता चलेगा कि मंदिर को भूकंप से खतरा तो नहीं?
मंदिर के फर्श पर होगा सहमति का प्रयास
केदारनाथ मंदिर में फर्श लकड़ी का हो या संगमरमर का, इसे लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति और एएसआई के अधिकारियों में कुछ मतभेद था। एएसआई, दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् के अनुसार इस पर सहमति का प्रयास होगा। सारी बातें लिखित में तय की जाएंगी।
कार्य जल्दी शुरू हो, इस बात पर फोकस है ताकि अधिक से अधिक समय कार्य के लिए मिल सके।
- वसंत स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई दून सर्किल