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इस कुख्यात शिकारी को सजा मिलने से उत्तराखंड ने ली राहत की सांस, जानिए पूरा मामला..

Wed, 22 Nov 2017 09:59 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 22 Nov 2017 09:59 AM IST
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Relief to Uttarakhand by punishing the hunter

वन्यजीव अंग बरामदगी के मामले में कुख्यात शिकारी को सजा सुनाए के बाद उत्तराखंड ने ली राहत की सांस ली। जानिए पूरा मामला..

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कुख्यात शिकारी भीमा बावरिया को फरीदाबाद में वन्यजीव अंग बरामदगी के मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उत्तराखंड ने भी राहत की सांस ली है। भीमा पर उत्तराखंड में कर्णप्रयाग से लेकर कोटद्वार तक मुकदमे दर्ज हैं।
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कार्बेट पार्क की दक्षिण सीमा से भीमा गैंग चलाता है। भीमा 2002 में कर्णप्रयाग में पुलिस के हत्थे चढ़ा था, उस वक्त भीमा के पास वन्यजीवों के शिकार में इस्तेमाल होने वाला फंदा, कड़का आदि औजार बरामद हुए थे।
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इसके बाद भी भीमा के कार्बेट पार्क के आसपास क्षेत्र में सक्रिय होने की खबर आती रही। 2005 में बिजनौर क्षेत्र में वह बाघ की खाल के साथ पकड़ा गया था। 2014 में भीमा कोटद्वार क्षेत्र के सनेह में वन्यजीव अंग के साथ पकड़ा गया।

 

वन्यजीवों के शिकार और तस्करी का चलाता था बड़ा गैंग चलाता, रिश्तेदार तक शामिल

Relief to Uttarakhand by punishing the hunter
जेल

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी आफ इंडिया के प्रमुख जोजफ टीटो के अनुसार फरीदाबाद में पर्यावरण कोर्ट ने सोमवार को 2012 में गुड़गांव क्षेत्र में वन्यजीव अंग (बाघ की खाल) बरामदगी के मामले में भीमा को तीन साल की सजा सुनाई है।

अभी उस पर कई केस और चल रहे हैं। यह वन्यजीवों के शिकार और तस्करी का बड़ा गैंग चलाता था, इसमें उसके रिश्तेदार तक शामिल थे। भीमा का मूवमेंट लगातार उत्तराखंड और उससे सटी सीमा में बना हुआ था।

 नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी के डीआईजी निशांत वर्मा के अनुसार भीमा को सजा हुई है, उसे सजा होने से वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर खतरा कुछ कम होगा। इसके अलावा दूसरे शिकारियों का हौसला भी कम होगा।

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