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Teachers Day 2021: पहाड़ के बच्चों की खातिर आशीष ने ठुकराई विदेश की नौकरी

Sun, 05 Sep 2021 09:45 AM IST
देहरादून ब्यूरो रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून
रेनू सकलानी, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 05 Sep 2021 09:45 AM IST
सार

राजकीय इंटर कॉलेज गरखेत टिहरी गढ़वाल में तैनात राजनीति विज्ञान के शिक्षक आशीष डंगवाल उत्तराखंड के इकलौते ऐसे शिक्षक है, जिनकी लोकप्रियता को देखते हुए साल 2019 में फेसबुक ने भी उन्हें सेलिब्रिटी का नीला टिक दिया। इंडो-अफ्रीकन अंतरराष्ट्रीय संगठन की ओर से आशीष को अपने साथ काम करने का ऑफर दिया गया।

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Teachers Day 2021: ashish dangwal Rejected foreign job for the sake of mountain children
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी किया था सम्मान - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

पहाड़ के बच्चों को ऊंची उड़ान देने के लिए युवा शिक्षक आशीष डंगवाल ने विदेश से मिल रही भारी भरकम सैलरी पैकेज की नौकरी को ठुकरा दिया।

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स्माइलिंग प्रोजेक्ट से चर्चाओं में आए थे आशीष
अपने अभिनव प्रयोगों को लेकर युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय आशीष अपने स्माइलिंग प्रोजेक्ट से चर्चाओं में आए थे। अब जल्द ही वह बेटियों की पढ़ाई पर जोर देते हुए ‘भारती’ प्रोजेक्ट लेकर आ रहे हैं।
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2019 में फेसबुक ने भी नीला टिक दिया
राजकीय इंटर कॉलेज गरखेत टिहरी गढ़वाल में तैनात राजनीति विज्ञान के शिक्षक आशीष डंगवाल उत्तराखंड के इकलौते ऐसे शिक्षक है, जिनकी लोकप्रियता को देखते हुए साल 2019 में फेसबुक ने भी उन्हें सेलिब्रिटी का नीला टिक दिया।
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इंडो-अफ्रीकन अंतरराष्ट्रीय संगठन की ओर से आशीष को अपने साथ काम करने का ऑफर दिया गया। यह संगठन नासा (नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन) के साथ भी जुड़ा है, लेकिन आशीष ने यह कहकर इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया कि वह अपना देश, अपना राज्य छोड़कर विदेश में नहीं बसना चाहते। आशीष का कहना है कि उन्होंने स्वयं भी सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है। अब वह सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में लगे हैं।

'सरकारी स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाना चाहता हूं'

आशीष कहते हैं कि हम जिन अभाव में पढ़े, वह आगे की पीढ़ी को महसूस नहीं होना चाहिए। इसलिए मैं कम संसाधनों में नए प्रयोग करके बच्चों के लिए सरकारी स्कूल को स्मार्ट स्कूल बनाना चाहता हूं। समाज के सक्षम लोगों को अपने साथ जोड़कर वह स्कूल के विकास में उनकी भी सहभागिता बढ़ा रहे हैं। बताया कि कोरोना के चलते उनकी बहुत सी योजनाएं रुकी हुई है, लेकिन हालात सामान्य होते ही वह उन पर तेजी से काम करेंगे।

यह है भारती प्रोजेक्ट
आशीष ने बताया कि हाईस्कूल और इंटर तक बेटियों की शिक्षा का स्तर अच्छा है। हर साल हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं में बेटियों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की खबरें हम पढ़ते हैं, लेकिन इसके बाद उच्च शिक्षा में उनकी उपस्थिति बहुत कम नजर आती है।

इसके पीछे कई वजह हैं, या तो उन्हें परिवार का सहयोग नहीं मिलता या फिर घर की आर्थिक स्थिति के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाती। आशीष ने कहा कि अभी वह इस पर ज्यादा जानकारी नहीं दे सकेंगे, लेकिन भारती प्रोजेक्ट पहाड़ की उन बेटियों को उड़ान देगा जो कुछ करना चाहती हैं।

घराट को लेकर काम करने पर आए थे चर्चा में
आशीष डंगवाल घराट को लेकर काम करने पर सुर्खियों में आए थे। जब उनका राजकीय इंटर कॉलेज भंकोली उत्तरकाशी से ट्रांसफर हुआ तो बच्चों से लेकर पूरा गांव उनकी विदाई समारोह में रोने लगा था। ऐसी विदाई किसी शिक्षक को नहीं मिली होगी। उन्होंने गांव में विलुप्त हो चुके घराट (पनचक्की) को लेकर काम किया। उन्होंने स्कूल के बच्चों के साथ मिलकर घराट के स्वरूप को बदला, जिसे फेसबुक पर लोगों ने खूब पसंद किया।

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