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एवरेस्ट विजेता बेटियों के लिए एक पिता का संघर्ष
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Jan 2014 03:58 PM IST
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एवरेस्ट पर जीत हासिल करने वाली ताशी नुंग्शी के पिता ने अमर उजाला से बांटी हकीकत।
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उस समय ताशी नुंग्शी की मां सोनीपत के पिता आंवली में अपने भरे पूरा परिवार के साथ रहते थे। उनकी मां का झुकाव भाइयों की तरफ ज्यादा था। बहनों को कमतर आंकती थी।
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वंश को लेकर चिंतित थी
यही वजह थी कि 1991 में जब मिलिट्री अस्पताल मेरठ में ताशी नुंग्शी का जन्म हुआ तो उन्होंने बेटे के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। वह वंश को लेकर चिंतित थी।
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ताशी नुंग्शी के पिता ने बताया क्योंकि वह भी मां की बातों से कहीं-न-कहीं दबाव महसूस करते थे। आखिर मैंने चुपचाप नसबंदी करा ली...।
अमर उजाला से यह हकीकत कर्नल (सेवानिवृत्त) वीरेंद्र सिंह मलिक ने अपने आवास पर अमर उजाला से बातचीत में बयां की। बकौल कर्नल मलिक उस वक्त बबीना में पोस्टिंग थी। मां ने कुछ दिन के लिए बोलना छोड़ दिया।
बेटियों की तारीफ करते फूले नहीं समाते
घर में कुछ दिन तनाव भी रहा, लेकिन बाद में हर किसी ने मेरे इस फैसले को मान लिया। आज लगता है कि मेरा फैसला बिल्कुल सही था। ताशी-नुंग्शी के गर्वीले पिता कर्नल वीरेंद्र मलिक आज अपनी बेटियों की तारीफ करते फूले नहीं समाते।
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उन्हें लगता है कि आज शायद उनका कोई बेटा होता तो वह भी समाज में शायद उन्हें उस सराहना का हकदार नहीं बना पाता, जो उन्हें ताशी-नुंग्शी का पिता होने की वजह से हासिल हुई।
वह हर उस माता-पिता को बधाई का हकदार मानते हैं, जिनकी केवल बेटी या बेटियां हैं।
ताशी का अर्थ गुड लक, नुंग्शी का लव
मलिक दंपति बेटियों को अपनी खुशकिस्मती समझते हैं। उनके प्यार का ओर-छोर नहीं। यही वजह है कि उन्होंने इनके नाम ताशी (गुड लक)और नुंग्शी (लव) रखे।
पढ़ाई और डांस में भी अव्वल
ताशी, नुंग्शी को अगर आप केवल माउंटेनियरिंग या एडवेंचर के लिए ही जानते हैं तो बता दें कि इंडियन क्लासिकल, पंजाबी डांस हो या सालसा, सभी में उनका कोई जोड़ नहीं।
अलग-अलग राज्यों में कई यूथ फेस्टिवल में शिरकत कर चुकीं बहनों ने गर्मी की छुट्टी में दून स्कूल में मशहूर कोरियोग्राफर श्यामक डावर का कैंप भी इसीलिए अटैंड किया ताकि कोरियोग्राफी में भी खुद को माउंटेनियरिंग की तरह मजबूत कर सकें।
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अब आप सोचेंगे कि प्रतिभा की धनी यह बहनें शायद पढ़ाई में अच्छी न हों, लेकिन यह भी बता दें कि पढ़ाई में भी इन बहनों ने खुद को साबित किया है।
मसूरी के गुरुनानक फिफ्थ सेंटेनरी से स्कूली पढ़ाई पूरी करने वाली ताशी ने 88 प्रतिशत अंकों के साथ बोर्ड एग्जाम उत्तीर्ण किया तो वहीं, नुंग्शी के 86 प्रतिशत अंक आए। पिता की ट्रांसफरेबल नौकरी की वजह से लगभग 14 राज्यों को जाना।
ऊटी के लारेंस स्कूल लवडेल भी शिक्षा हासिल की। फिर भी उत्तराखंड वह राज्य है जो उनकी रगों में बसता है।
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सिक्किम मणिपाल यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में अंडर ग्रेजुएट इन बहनों ने यूएसए से पीस मेकिंग में एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स भी पूरा किया, इसके अलावा तकनीकी पक्ष मजबूत करने के लिए कंप्यूटर एप्लिकेशन में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया।
अब पीस मेकिंग की राह पर चलकर वह शांति प्रसार को अपना ध्येय बनाए हुए हैं।