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शक्तिमान प्रकरण: मुकदमा वापसी को दोबारा अर्जी, पुलिस के घोड़े शक्तिमान की हुई थी मौत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 26 Jul 2018 09:54 PM IST
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shaktiman statue
- फोटो : amar ujala file photo
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पुलिस के घोड़े शक्तिमान की मौत के मामले में विधायक गणेश जोशी के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने के लिए सरकार ने एक बार फिर कोर्ट से गुहार लगाई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएम पांडेय की कोर्ट ने सरकार की अर्जी पर सुनवाई के लिए एक अगस्त की तिथि नियत की है। बता दें कि न्यायालय सरकार की एक अर्जी को पिछले साल खारिज कर चुका है। गणेश जोशी व उनके साथियों नेताओं पर घटना वाले दिन धारा 144 का उल्लंघन करने का भी आरोप है।
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14 मार्च 2016 में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ विधानसभा कूच किया था। क्षेत्र में उस वक्त धारा 144 लागू थी। इस दौरान किसी तरह भाजपा विधायक गणेश जोशी बेरिकेडिंग पार कर अपने समर्थकों के साथ रिस्पना पुल तक पहुंच गए थे। वहां पुलिस के घुड़सवार व अन्य सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस आपाधापी में पुलिस के घुड़सवार रविंद्र सिंह के घोड़े की टांग टूट गई थी। बाद में वायरल हुए घटनाक्रम की वीडियो में गणेश जोशी घोडे़ शक्तिमान पर लाठी से वार करते भी दिख रहे थे।
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इसके बाद पुलिस ने गणेश जोशी व उनके समर्थकों के खिलाफ घोड़े से क्रूरतापूर्ण व्यवहार करन े(आईपीसी 429) व धारा 144 का उल्लंघन (आईपीसी 188) करने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया था। इसके चार दिन बाद 18 मार्च 2016 को गणेश जोशी को सहारनपुर रोड स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, 22 मार्च को उन्हें न्यायालय ने जमानत दे दी थी। इधर, शक्तिमान को बचाने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन 20 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी।
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इस प्रकरण में सरकार ने पिछले साल अक्तूबर में भी मुकदमा वापस लेने को प्रार्थनापत्र दिया था। मगर, न्यायालय ने सरकार की अर्जी को खारिज कर दिया था। अब बृहस्पतिवार को सरकार की ओर से दोबारा सीजेएम कोर्ट में अर्जी लगाई गई है। सरकार की ओर से संयुक्त निदेशक अभियोजन जेएस बिष्ट ने कोर्ट को बताया है कि यह मुकदमा राजनीतिक प्रकृति का है। जुलूस प्रदर्शनों, अनशनों आदि के दौरान अधिकांश तौर पर मुकदमे दर्ज हो जाते हैं। लिहाजा, ऐसे मामले को वापस लेकर वाद का निस्तारण किया जाना न्यायसंगत रहेगा। अभियोजन के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए न्यायालय ने एक अगस्त की तिथि नियत की है।
हरक सिंह मामले में सुनवाई 30 को
21 दिसंबर 2009 को तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने भाजपा सरकार के खिलाफ विधानसभा कूच किया था। कूच के दौरान पुलिस के साथ धक्कामुक्की, पथराव, मारपीट और बलवा करने के मामले में हरक सिंह रावत, प्रदीप टम्टा, सुबोध उनियाल, यशपाल आर्य आदि नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में कई बार जमानती और गैर जमानती वारंट भी जारी किए जा चुके हैं। इस मुकदमे को वापस लिए जाने के लिए भी सरकार ने गत 21 जुलाई को प्रार्थनापत्र दिया था। बृहस्पतिवार को न्यायालय ने इस प्रार्थनापत्र पर सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तिथि नियत की है।