रावल बनने के लिए देनी होगी कड़ी 'परीक्षा'
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बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) वी केशवन नंबूदरी के एक महिला से छेड़-छाड़ के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद रावल के आचरण को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
मंदिर समिति ने इसके लिए एक आचार नियमावली की बात दोहराते हुए रावल चयन के मानकों में बदलाव करने का फैसला किया है।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की सोमवार को लक्ष्मण झूला रोड, ऋषिकेश पर हुई बैठक में इस बाबत तय किया गया।
रावल प्रकरण की जांच कर रही टीम के अध्यक्ष चंद्रकिशोर मैठाणी के अनुसार भविष्य में रावल का चयन कड़े परीक्षण, योग्यता और उसके परंपरा आधारित ज्ञान के आधार पर होगा।
अब तक रावल के लिए निकलता था विज्ञापन
अभी तक रावल की नियुक्ति समिति की तरफ से निकाली गई एक विज्ञप्ति के आधार पर होती है। लेकिन अब नियुक्ति से पहले एक टीम जाकर केरल में रावल की पृष्ठभूमि की भी जांच करेगी।
श्री बदरीनाथ धाम के रावल वी. केशवन नंबूदरी के निलंबन के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने रावल के लिए एक आदर्श नियमावली तैयार की है। जिस पर पांचों पंचायतों और तीर्थ पुरोहितों ने अपनी सहमति दी है।
बीकेटीसी उपाध्यक्ष मधु भट्ट के अनुसार नियमावली पर बुधवार 19 फरवरी को दून में होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आवश्यक फेरबदल भी होगा।
समिति ने कभी गंभीरता से नहीं लिया
बैठक में पांचों पंचायतों और तीर्थ पुरोहितों ने रावल प्रकरण के लिए परोक्ष रूप से मंदिर समिति को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि परंपराएं आदि शंकाराचार्य ने स्थापित की हैं, मगर रावल उनका पालन नहीं कर रहे हैं।
बताया कि पूर्व में भी कई बार रावलों के निरंकुश होने के मामले सामने आए, मगर मंदिर समिति ने इसे कभी गंभीरता से नहीं लिया।
उन्होंने रावल के लिए आचार संहिता बनाने, अनुशासन समिति गठित करने, शीतकाल में धामों के प्रवास पर अभिषेक करने, परंपराओं के जानकारों को मंदिर समिति में शामिल करने की सिफारिश की।
बैठक में महापंचायत में समिति के मुख्य कार्य अधिकारी बीडी सिंह, सदस्य हरीश डिमरी, गुलाब नेगी, शैलेंद्र डबराल, बचन सिंह रावत, आरके थपलियाल, अतुल डिमरी, हरीश गौड़, माणा पंचायत के पीतांबर मोलफा, डिमरी पंचायत के सुरेश डिमरी, पंडा पंचायत के कृष्णकांत, रेंकवाल पंचायत के भोला सिंह, बामिणी पंचायत के राधाकृष्ण भट्ट, संदीप भट्ट आदि मौजूद थे।
प्रतिनिधियों ने पंचायत में उठाए सवाल
- केरल में नंबूदरी ब्राह्मणों के गांवों की जांच की जाए। रावल के चयन के लिए शैक्षणिक दस्तावेजों और शास्त्रों के ज्ञान की बारीकी से रेकी की जाए।
- रावल की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अनुशासन समिति गठित हो। जिसमें विभिन्न वर्गों के लोगों को रखकर रावल और समिति की गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
- शास्त्र और मान्यताओं के जानकारों को मंदिर समिति में शामिल किया जाए।
- धाम में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। बताया गया कि पूर्व में लगे कैमरे मंदिर समिति ने हटा दिए।
- शीतकाल में धामों के प्रवासों और देवभूमि के अन्य मंदिरों में अभिषेक किया जाए।
शीतकाल में पांडुकेश्वर में रहेंगे रावल
श्री बदरीनाथ धाम के रावल शीतकाल में छह महीने पांडूकेश्वर अथवा जोशीमठ में रहेंगे। इस बीच उन्हें बाहरी प्रांतों में भ्रमण करने अथवा सनातन धर्म के प्रचार के लिए बाकायदा छुट्टी लेनी होगी। दूसरे प्रदेशों में प्रवास के दौरान उनके साथ तीर्थ पुरोहित भी रहेंगे।