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Doon Hospital: मरीज के फूड पाइप में दुर्लभ श्रेणी के कैंसर स्माल सेल कार्सिनोमा की पुष्टि, दिखे थे ये लक्षण

Fri, 10 Jan 2025 09:38 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Fri, 10 Jan 2025 09:38 PM IST
सार

मरीजों के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अगल-अलग श्रेणी के कैंसर रोग को सामान्य तौर पर देखा जाता है। इसमें बॉडी के लगभग सभी अंग शामिल हैं।

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Doon Hospital: Rare category of cancer small cell carcinoma confirmed in the patient's food pipe
डॉक्टर - फोटो : Istock(प्रतीकात्मक तस्वीर)

विस्तार

दून अस्पताल में एक मरीज में स्माल सेल कार्सिनोमा नाम के दुर्लभ श्रेणी के कैंसर की पुष्टि हुई है। मरीज को उपचार के लिए भर्ती किया गया है। चिकित्सक के मुताबिक मरीज खाना और पानी न निगल पाने की शिकायत लेकर अस्पताल आया था। एंडोस्कॉपी गाइडेड बायोप्सी जांच के बाद मरीज में कैंसर रोग की पहचान हुई है।

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मरीजों के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में अगल-अलग श्रेणी के कैंसर रोग को सामान्य तौर पर देखा जाता है। इसमें बॉडी के लगभग सभी अंग शामिल हैं। लेकिन शरीर के कई अंग ऐसे भी हैं, जहां पर कुछ श्रेणी के कैंसर बिल्कुल दुर्लभ माने जाते हैं। दून अस्पताल में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया है।
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एक मरीज के फूड पाइप (ईसोफेगस) में दुर्लभ श्रेणी के कैंसर स्माल सेल कार्सिनोमा की प्रमाणिक पुष्टि हुई है। दून अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक जोशी के मुताबिक मरीज की उम्र करीब 60 वर्ष है। शुरूआत में मरीज को खाने-पीने में तकलीफ हो रही थी। जांच के बाद मरीज के फूड पाइप के निचले हिस्से में विकार की पहचान हुई है।
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आमतौर पर दो श्रेणी के कैंसर रोग आते हैं सामने
डॉ. शशांक जोशी बताते हैं कि आमतौर पर मरीजों में स्क्वैमस और एडीनो सेल कैंसर देखने को मिलता है। जो शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। लेकिन स्माल सेल कार्सिनोमा नामक कैंसर का फूड नली में होना काफी असामन्य घटना है। हालांकि इस कैंसर को फेफड़े, पेंक्रियाज और छोटी आंत में सामान्य माना जाता है। चिकित्सक के मुताबिक इस तरह के तीन प्रतिशत से भी कम मामलेे आते हैं।

इसके तय उपचार की व्यवस्था नहीं
डॉ. शंशाक जोशी के मुताबिक अगर स्माल सेल कार्सिनोमा कैंसर मरीज के ईसोफेगस में हो जाते हैं, तो इसके उपचार के लिए कोई प्रमाणिक विधि का अब तक इजात नहीं हुआ है। ऐसी स्थिति में इस मरीज को सामान्य कैंसर की तरह उपचार दिया जा रहा है। हालांकि इससे मरीज की हालत में काफी सुधार देखने को मिला है। मरीज को रेडियोथैरेपी के लिए भेजा गया है।

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