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बाबा रामदेव बोले, जाति और धर्म से ऊपर है पतंजलि का 'ऋषिग्राम', यहां शूद्र भी पहन सकते हैं जनेऊ

Thu, 22 Mar 2018 07:52 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 22 Mar 2018 07:52 AM IST
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Ramdev sannyasa Initiation campaign in rishigram start in haridwar
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योगगुरु बाबा रामदेव ने भारत को आध्यात्मिक शक्ति बनाने की नई मुहिम शुरू की है। बाबा रामदेव साल 2050 तक 1000 संन्यासियों को दीक्षित करेंगे। महाअभियान के पहले चरण में रामनवमी के दिन 88 संन्यासी राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे जिसमें 37 ब्रह्मचारिणी और 51 ब्रह्मचारी हैं।

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महाअभियान के तहत बुधवार को नवनिर्मित ऋषि ग्राम में चतुर्वेद महापारायण यज्ञ का शुभारंभ किया गया, जिसमें पांच यज्ञवेदियां बनाई गई हैं। इनमें से दो यज्ञवेदियों में ऋग्वेद और शेष तीन में क्रमश: यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद का यज्ञ किया गया ।
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इस अवसर पर योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि के उत्तराधिकारी से ज्यादा हमें अपने ऋषियों के उत्तराधिकारी की चिंता है। हम गौतम, कणादि, पाणिनी और महर्षि दयानंद के वंशज हैं।
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इनकी परंपरा को निभाने के लिए ही यह अनुष्ठान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रामनवमी के पावन पर्व पर चतुर्वेद महापारायण यज्ञ के समापन के पश्चात हरकी पैड़ी पर मां गंगा के तट पर संन्यास की दीक्षा दी जाएगी।

Ramdev sannyasa Initiation campaign in rishigram start in haridwar
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इसके पश्चात ये भावी ऋषि, ऋषिकाएं श्वेत वस्त्र त्यागकर भगवा वस्त्र धारण करेंगे। बाबा रामदेव ने बताया कि ऋषिग्राम में 100 से ज्यादा कुटिया हैं जिनका निर्माण बिना धातु के किया गया है।

यह परिसर भारत की भावी ऋषि परंपरा का निर्वहन करने वाले साधु-साध्वियों के लिए है जहां मातृभूमि, भगवान, ऋषिसत्ता और अध्यात्मसत्ता में जीवन व्यतीत करने वाले लोग जीवनयापन करेंगे।

21 दिनों के अनुष्ठान में उपवास, मौन, यज्ञादि चल रहे हैं। जीवन में चारों वेदों को प्रतिष्ठापित कर अपने ऋषि प्रतिमूर्ति बनकर ये सब भारत को एक आध्यात्मिक राष्ट्र और पूरे विश्व को आध्यात्मिक बनाने के लिए संकल्पित हो रहे हैं।

एएनआई में बातचीत में उन्होंने कहा कि, जनेऊ के लिए कहा जाता है कि इसे केवल ब्राह्मण ही पहनते हैं, लेकिन दीक्षा लेने के बाद इसे शूद्र भी पहन सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र, हर कोई संन्यासी बनने के लिए हमारे पास आता है। ऐसा कहा जाता है कि जनेऊ केवल ब्राह्मण ही पहन सकते हैं, लेकिन हमने निम्न वर्ग के कई लोगों को यहां तक कि महिला संन्यासियों को भी जनेऊ पहनने के लिए कहा।’

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बाबा रामदेव ने बताया कि ऋषि ग्राम में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य के साथ-साथ वाल्मीकि, दलित और वनवासी समाज के लोग एक साथ संन्यास की दीक्षा लेंगे। यहां जाति का कोई बंधन नहीं है। सभी बाधाओं व अवरोध को समाप्त करते हुए यह एक अभिनव प्रयोग है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाओं को वेदों की दीक्षा नहीं दी जाती थी, लेकिन यहां महिलाओं को भी पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि वे माता-पिता सौभाग्यशाली हैं जिन्होंने अपनी संतानों को राष्ट्रयज्ञ में समर्पित किया है। जो भी संन्यास की दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं इनका परिवार ऋषियों का कुल है। जिस कुल परंपरा में कोई संन्यास पथ पर चलता है उसका पूरा कुल वंश धन्य हो जाता है।

इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह पावन अनुष्ठान आने वाले हजारों-हजारों वर्षों तक वैदिक युग की पुन: प्रतिष्ठा के लिए मील का पत्थर बनेगा। इसके लिए महर्षि दयानंद ने जो कार्य किए हैं उनका यह संसार हमेशा ऋणि रहेगा। इतिहास में पहली घटना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रेष्ठ व विद्वान संन्यासी तैयार हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु बनना तो आसान है क्योंकि गुरु तो लोग बना देते हैं लेकिन एक शिष्य बनना कठिन है। क्योंकि शिष्य को एक अच्छा शिष्य बनना होता है जो अपने गुरु की आज्ञा को पूरा करे।

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