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पहाड़ को हरा-भरा करने में जुटा मैदान का ये सिपाही
हेम कांडपाल/ अमर उजाला, चौखुटिया(अल्मोड़ा)
Updated Sat, 09 Sep 2017 03:34 PM IST
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चेकडैम बनाने जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे हैं
- फोटो : amarujala
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रामचंद वीरवानी ने कभी राज्यसभा के निदेशक जैसे बड़े पद को सुशोभित किया और आज दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में दिनभर मजदूरों के साथ खड़े होकर अपने खर्च से चाल-खाल (खाव) और चेकडैम बनाने जैसा चुनौतीपूर्ण कार्य कर रहे हैं। पहाड़ों से सीधा संबंध न होने के बावजूद दिल्ली से आकर जल, जंगल और जमीन को बचाने की ऐसी पहल पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनके गहरे लगाव का ही द्योतक है।
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दिल्ली के द्वारिका निवासी रामचंद वीरवानी राज्यसभा के निदेशक पद से दिसंबर 2011 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने पिछले चार सालों में द्वाराहाट विकास खंड के नट्टागुल्ली, बिठोली, दूनागिरी, कांडे और नागार्जुन में अपने खर्च पर अब तक करीब पचास खाल और कुछ चेकडैम बनवाए हैं। वे किसी संस्था और व्यक्ति को धनराशि देने के बजाय अपने हाथ से सीधे मजदूरों को भुगतान करते हैं। दिनभर अपनी निगरानी में खाल बनवाते हैं और प्रतिदिन शाम को भुगतान करते हैं।
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वीरवानी की सोच देखिए, कहते हैं- देश ने उन्हें बड़ा पद नाम और अच्छी पेंशन दी है। ऐसे में देश को कुछ लौटाने का उनका भी फर्ज बनता है। देश के लिए उनकी पीड़ा और चिंता उन्हें पर्यावरण संरक्षण की ओर खींच लाई है।
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सूखी जमीन को देखते ही उसे हराभरा करने की मुहिम में जुट जाते हैं
द्वाराहाट में करीब पचास खाल बनाए हैं
घुमक्कड़ प्रवृत्ति के वीरवानी जहां भी जाते सूखी जमीन को देखते ही उसे हराभरा करने की मुहिम में जुट जाते। पहले उन्होंने पौधरोपण पर कार्य किया, लेकिन रखरखाव की समुचित व्यवस्था न होने से उन्होंने पेड़ के बजाय खाल बनवाने पर ध्यान केंद्रित कर दिया।
वीरवानी के अनुसार वह अब तक करीब सत्तर खाल बनवा चुके हैं जिसमें अकेले द्वाराहाट में करीब पचास खाल बनाए हैं। कुछ स्थानों पर चेकडैम भी बनवाए हैं। सभी कार्य अपने खर्च पर ही करवाते हैं। उन्होंने ऋषिकेश और गंगोलीहाट में भी कुछ खाल बनवाए। मध्यप्रदेश की फोकनार की पहाड़ी और बालाघाट में भी पौधरोपण किया और खाल बनवाए। मध्यप्रदेश में ही गायत्री परिवार के कहने पर एक कुएं का निर्माण भी कराया।
सूखते खेतों को देखकर मन पसीजा
रामचंद वीरवानी बताते हैं कि वह उत्तराखंड में सीड संस्था के मोहन कांडपाल के बुलावे पर 2013 में आए। यह संस्था भी जल संरक्षण और पर्यावरण की दिशा में द्वाराहाट, भिकियासैंण आदि कई ब्लॉकों में कार्य कर रही है। गांवों के सूखते खेतों को देखकर उनका मन पसीज उठा और उन्होंने जल संरक्षण की दिशा में कार्य शुरू कर दिया। कहते हैं कि इस कार्य से धन और समय का सदुपयोग तो हो ही रहा है साथ ही आत्मसंतुष्टि भी हो रही है।
वीरवानी के अनुसार वह अब तक करीब सत्तर खाल बनवा चुके हैं जिसमें अकेले द्वाराहाट में करीब पचास खाल बनाए हैं। कुछ स्थानों पर चेकडैम भी बनवाए हैं। सभी कार्य अपने खर्च पर ही करवाते हैं। उन्होंने ऋषिकेश और गंगोलीहाट में भी कुछ खाल बनवाए। मध्यप्रदेश की फोकनार की पहाड़ी और बालाघाट में भी पौधरोपण किया और खाल बनवाए। मध्यप्रदेश में ही गायत्री परिवार के कहने पर एक कुएं का निर्माण भी कराया।
सूखते खेतों को देखकर मन पसीजा
रामचंद वीरवानी बताते हैं कि वह उत्तराखंड में सीड संस्था के मोहन कांडपाल के बुलावे पर 2013 में आए। यह संस्था भी जल संरक्षण और पर्यावरण की दिशा में द्वाराहाट, भिकियासैंण आदि कई ब्लॉकों में कार्य कर रही है। गांवों के सूखते खेतों को देखकर उनका मन पसीज उठा और उन्होंने जल संरक्षण की दिशा में कार्य शुरू कर दिया। कहते हैं कि इस कार्य से धन और समय का सदुपयोग तो हो ही रहा है साथ ही आत्मसंतुष्टि भी हो रही है।