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Rajaji Tiger Reserve: रेडियो कॉलर खराब होने से नहीं मिल पा रही 23 दिन से लापता बाघिन की लोकेशन

Thu, 13 Oct 2022 05:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 13 Oct 2022 05:14 PM IST
सार

रेडियो कॉलर लगाने या बैटरी बदलने के लिए टाइगर को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया जाता है। लेकिन, लापता बाघिन के मामले में इसकी जरूरत नहीं थी। बाघिन की खोजबीन की जा रही है।

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Rajaji Tiger Reserve: Location of missing tigress for 23 days could not be found due to faulty radio collar
बाघिन - फोटो : सोशल मीडिया(प्रतीकात्मक तस्वीर)

विस्तार

सेटेलाइट रेडियो कॉलर काम नहीं करने के चलते राजाजी टाइगर रिजर्व से लापता बाघिन की लोकेशन नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, बाघिन टाइगर रिजर्व में रहने की आदी हो गई थी। ऐसे में उसके गले में लगाए गए रेडियो काॅलर को बदलने की जरूरत महसूस नहीं की गई। लेकिन, वन्यजीव विशेषज्ञों की इस प्लानिंग को गच्चा देकर बाघिन 23 दिन से लापता है। 

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मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीर सिन्हा का कहना है कि वर्ष 2020 में जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व लाई गई बाघिन के गले में सेटेलाइट रेडियो कॉलर लगाया गया था। इसके जरिये उसकी निगरानी की जा रही थी। एक साल तक उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई। लेकिन, सेटेलाइट रेडियो कॉलर में लगी बैटरी सिर्फ एक साल तक काम करती है। ऐसे में एक साल बाद बैटरी ने काम करना बंद कर दिया होगा। 
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रेडियो कॉलर लगाने या बैटरी बदलने के लिए टाइगर को ट्रेंकुलाइज कर बेहोश किया जाता है। लेकिन, लापता बाघिन के मामले में इसकी जरूरत नहीं थी। बाघिन की खोजबीन की जा रही है। एपीसीसीएफ (वन्यजीव इंटेलीजेंस) रंजन मिश्रा की अगुवाई में टीम तमाम पहलुओं की जांच कर रही है।

गर्भवती होने या घने जंगल में जाने की पुष्टि नहीं 

लापता बाघिन के गर्भवती होने और उसके टाइगर रिजर्व के कोर टाइगर हैबिटेट जोन में कहीं होने की संभावनाओं को लेकर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने कहा कि इस बात की अभी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है। उसके मिलने के बाद ही पता चलेगा कि वह गर्भवती है या नहीं। यदि वह गर्भवती है तो यह टाइगर रिजर्व के लिए खुशखबरी है। फिलहाल उसको खोजने पर जोर है। 

बाघिन की खोज में जुटीं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीमें 

लापता बाघिन की खोजबीन के लिए टाइगर रिजर्व की टीम के साथ वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फाउंडेशन (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) की टीमों को भी लगाया गया। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने भी टाइगर रिजर्व के निदेशक से मामले की जानकारी ली है। 

राजाजी टाइगर रिजर्व के कार्यवाहक निदेशक राजीव धीमान के मुताबिक, सर्च अभियान में लापता बाघिन के पैरों के निशान चिल्लावाली रेंज की ओर मिले हैं। उसकी कुछ गतिविधियां ट्रैप कैमरों में भी कैद की गई है।

हालांकि, अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाया है कि वह कहां है। दूसरी ओर, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीर सिन्हा ने यूपी के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से भी बात कर बाघिन की खोजबीन में मदद मांगी है। यूपी वन विभाग के अधिकारियों की अगुवाई में भी टीमें टाइगर रिजर्व से सटे इलाकों में बाघिन को खोज रही हैं।

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