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पहाड़ों पर हुई बारिश और ओलावृष्टि
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पहाड़ी अंचलों में बुधवार को मौसम के बदले मिजाज अचानक बदल के बीच बूंदाबांदी और ओलावृष्टि हुई। इससे मौसम ठंडा हो गया। ओलावृष्टि से लहसुन, मसूर की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
बुधवार सुबह दिन की शुरुआत चटक धूप के साथ हुई। दोपहर बाद आसमान में काले बादल छाने लगे। शाम करीब पांच बजे क्षेत्र में बूंदाबांदी शुरू हो गई। छावनी बाजार क्षेत्र में करीब 15-20 मिनट तक बारिश हुई। वहीं, कंधाड़ और इंद्रोली गांव में ओलावृष्टि हुई। इससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। चकराता का अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 4 डिग्री रहा। वहीं, विकासनगर और आसपास के मैदानी इलाकों में दिनभर चटक धूप खिली रही।
काश्तकार अर्जुन सिंह, मोहर सिंह, शरण सिंह, जीत सिंह, शूरवीर सिंह, हुकम सिंह आदि का कहना है कि पूर्व में हुई ओलावृष्टि से काश्तकार उबर भी नहीं पाए थे कि दोबारा से हुई ओलावृष्टि ने उनकी कमर पूरी तरह से तोड़ कर रख दी है। फसल को नुकसान पहुंचने से उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है। एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने बताया कि मामले में राजस्व उपनिरीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है।
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बुधवार सुबह दिन की शुरुआत चटक धूप के साथ हुई। दोपहर बाद आसमान में काले बादल छाने लगे। शाम करीब पांच बजे क्षेत्र में बूंदाबांदी शुरू हो गई। छावनी बाजार क्षेत्र में करीब 15-20 मिनट तक बारिश हुई। वहीं, कंधाड़ और इंद्रोली गांव में ओलावृष्टि हुई। इससे फसलों को नुकसान पहुंचा है। चकराता का अधिकतम तापमान 16 और न्यूनतम 4 डिग्री रहा। वहीं, विकासनगर और आसपास के मैदानी इलाकों में दिनभर चटक धूप खिली रही।
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काश्तकार अर्जुन सिंह, मोहर सिंह, शरण सिंह, जीत सिंह, शूरवीर सिंह, हुकम सिंह आदि का कहना है कि पूर्व में हुई ओलावृष्टि से काश्तकार उबर भी नहीं पाए थे कि दोबारा से हुई ओलावृष्टि ने उनकी कमर पूरी तरह से तोड़ कर रख दी है। फसल को नुकसान पहुंचने से उनके सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी। उन्होंने सरकार से मुआवजे की मांग की है। एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने बताया कि मामले में राजस्व उपनिरीक्षक से रिपोर्ट मांगी गई है।
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