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Uttarakhand: राहुल गांधी राजनीतिक एजेंडे के साथ आएंगे तो स्वीकार नहीं करेंगे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का बयान

Sun, 29 Jan 2023 05:09 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 29 Jan 2023 05:09 PM IST
सार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि जोशीमठ के अस्तित्व को बचाना और यात्रा को प्रभावित होने से रोकना पार्टी का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रभावितों की सुविधा व सलाह के अनुसार ही पुनर्वास की नीति बनाई जाएगी।

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Rahul Gandhi comes with political agenda Will not accept BJP state president Mahendra Bhatt statement
उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट - फोटो : ट्वीटर

विस्तार

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा, राहुल गांधी नृसिंह मंदिर के दर्शन करने के लिए जोशीमठ आ रहे हैं, तो उनका स्वागत है, लेकिन यदि वह किसी राजनीतिक एजेंडे के साथ वहां जाएंगे, तो लोग इसे स्वीकार नहीं करेंगे। बदरीनाथ के पूर्व विधायक रहे भट्ट भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र में कैंप कर चुके हैं। अमर उजाला के उप समाचार संपादक राकेश खंडूड़ी ने उनसे भू-धंसाव क्षेत्र और प्रभावितों के विस्थापना और पुनर्वास से जुड़े कई पहलुओं पर बातचीत की। पेश है यह रिपोर्ट:

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सवाल : जोशीमठ की समस्याओं के लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं?

हमने ऐसी कल्पना भी नहीं की थी। लोग एनटीपीसी या ऑलवेदर रोड या अन्य पर सवाल उठा रहे हैं। वैज्ञानिकों की जांच रिपोर्ट ही प्रमाण देगी कि असल वजह क्या है।

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सवाल : लेकिन हालात यहां तक बन गए हैं कि ज्योतिर्मठ को ही अन्यत्र शिफ्ट करने की बातें हो रही हैं?

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वह पौराणिक, धार्मिक स्थान है। करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। ज्योतिर्मठ से ही इसकी पहचान है। इसके स्थान को नहीं बदला जा सकता। सीएम धामी लगातार समीक्षा कर रहे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा है कि चाहे जो जोशीमठ के अस्तित्व को बचाना है। वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर चीजें तय होंगी।

सवाल : आप विधायक रहे हैं। आपके समय में इसे गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया?

यह समस्या तत्काल आई। पहले इस तरह के प्रमाण सामने नहीं आए। मेरे विधायक कार्यकाल में कहीं ऐसी स्थिति नहीं थी।

सवाल : 14 माह से लोग वहां संघर्ष कर रहे हैं, उनकी बात को सरकार तक पहुंचाने के लिए आपने क्या किया?

संघर्ष एक पक्ष हो सकता है। आपदा बताकर नहीं आती। सरकार और संगठन पूरी तत्परता से काम किया। तत्काल जानमाल की रक्षा की। लोगों के मन से भय को दूर किया। यात्रा प्रभावित होने से बचाना तीसरा पक्ष है।

सवाल : बदरीनाथ यात्रा का मार्ग में ही दरारें आ गई हैं, कैसे होगी यात्रा?

यात्रा बाधित नहीं होगी। मार्ग पर जहां दरारें हैं, वैज्ञानिक उनके उपचार के सुझाव देंगे। तपोवन आपदा के बाद से मार्ग पर भू-स्खलन क्षेत्र में उपचार की कार्ययोजना बना ली गई है। दरारें सीमित दायरे में हैं।

सवाल : जोशीमठ में भू-धंसाव के लिए स्थानीय लोग एनटीपीसी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। आपका क्या मत है?

विकास की योजनाएं जब बनती है, तो वैज्ञानिक भूगर्भीय जांच होती हैं। जब यह अनुमति मिली होगी, तब ये सब उपाय किए गए होंगे। ये सब बातेंं भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।

सवाल : लेकिन लोगों का कहना है बाईपास टनल बनाने से जोशीमठ की समस्या बढ़ी?

मेरा खुद का आरोप है। तत्कालीन सरकारों ने एनटीपीसी से जो समझौता हुआ था, उन्हें धरातल पर नहीं उतारा गया।

सवाल : वो समझौता क्या था?

जोशीमठ के सभी भवनों का बीमा कराएंगे। उस कालखंड में इसे पूरा नहीं किया गया। इस तरह की आपदाएं आएंगी, उनके बचाव के लिए जो भी खर्च होगा, उसे एनटीपीसी करेगा। जब घटना हो गई, वही लोग धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्होंने समझौता का उल्लंघन किया।

सवाल : भाजपा के केंद्रीय नेता जोशीमठ नहीं आए ?

जोशीमठ का राजनीतिकरण उचित नहीं हैं। किसी राष्ट्रीय नेता को लाकर वहां राजनीतिकरण करें, ये उचित नहीं हैं।

सवाल : राहुल गांधी तो फरवरी में जोशीमठ आ रहे हैं, क्या कहेंगे?

नृसिंह मंदिर के दर्शन के लिए राहुल आ रहे हैं, तो उनका स्वागत है, लेकिन किसी राजनीतिक एजेंडे के साथ उनका आना यहां के लोग उसे स्वीकार नहीं करेंगे। राहुल बताएं कि बदरीनाथ मंदिर के दर्शन के लिए कितनी बार आए?

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सवाल : विस्थापन और पुनर्वास में देरी क्यों हो रही है?

सरकार के स्तर से पूरी गंभीरता से विचार हो रहा है। तीन तरह के विस्थापन पर बात हो रही है। जिनकी जमीन-जायदाद जोशीमठ में ही है, वे जोशीमठ के आसपास ही रहना चाहेंगे। जो गांवों से जोशीमठ में आए हैं, ऐसे लोगों के लिए वन टाइम सेटलमेंट का प्रस्ताव है। बाहर से आए होटल व अन्य व्यवसायी हैं, उन्हें पीपलकोटी से लेकर जोशीमठ तक नेशनल हाईवे के पास की भूमि का विकल्प दिया गया है।

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