राहुल गांधी का 'राज' खुलने से उत्तराखंड में हलचल
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राजबब्बर की उम्मीदवारी ने उत्तराखंड के नेताओं को साफ संकेत दे दिए हैं कि अब पार्टी में राहुल गांधी की ही चलेगी।
छात्र राजनीति से ही समाजवाद का लबादा ओढ़ने वाले नेता-अभिनेता राजबब्बर राहुल गांधी के करीबी हैं। कभी राजनैतिक गुरु रहे मुलायम सिंह यादव से अलग होने के बाद राजबब्बर को कांग्रेस का प्लेटफार्म देने वाले राहुल गांधी ही हैं।
राज्य के राज्यसभा दावेदार अधिकारिक तौर पर पार्टी आलाकमान के फैसले पर कुछ नहीं बोलना चाहते हैं लेकिन उनका कहना है कि सोनिया गांधी को फैसला लेना होता तो उन्हें मायूसी न मिलती। बहुगुणा खेमे के नेता भी कहते हैं कि पूरी तरह से राहुल गांधी की ही चली है।
कांग्रेस ने मनोरमा शर्मा डोबरियाल के निधन से खाली हुई राज्य सभा सीट पर उम्मीदवार तय कर लिया है। पार्टी नेतृत्व ने कई दिनों की मशक्कत के बाद अभिनेता और नेता राजबब्बर को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राजबब्बर की उम्मीदवारी से एक बार फिर उत्तराखंड में बाहरी नेताओं को यहां से राज्यसभा भेजने पुरानी परंपरा लौटी है। राज्य ने अभी बाहरी नेताओं में सुषमा स्वराज और संघ प्रिय गौतम (भाजपा), सत्यव्रत चतुर्वेदी और कैप्टन सतीश शर्मा (कांग्रेस) को राज्यसभा भेजा है।
राज्य के नेताओं के विरोध और बढ़ती दावेदारी को देखते हुए हाल के सालों में कांग्रेस-भाजपा ने तरुण विजय, महेंद्र माहरा और मनोरमा डोबरियाल शर्मा को राज्यसभा भेजने का फैसला लिया था। राज्यसभा नामांकन के लिए मंगलवार को अंतिम दिन है।
सीएम खेमे को राजबब्बर की उम्मीदवारी की जानकारी दोपहर बाद दे दी गई थी। बताते हैं कि नामांकन पत्रों की व्यवस्था और अन्य दस्तावेज भी तैयार होने लगे थे। बावजूद पार्टी में विरोध के अंदेशे से राज के नाम को राज रखा गया। बताया गया है कि राजबब्बर मंगलवार की सुबह देहरादून पहुंच रहे हैं और दोपहर एक बजे के आसपास अपना नामांकन दाखिल करेंगे।
राजबब्बर की उम्मीदवारी को लेकर तभी से अटकलें शुरू हो गई थीं जब फरवरी में वे मुख्यमंत्री से मिलने सचिवालय पहुंचे थे। कहीं न कहीं मुख्यमंत्री भी उनकी उम्मीदवारी को लेकर तैयार थे लेकिन स्थानीय दबाव और समीकरण के चलते उन्होंने फैसला कांग्रेस आलाकमान पर छोड़ा।
राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर कई नाम सामने आए थे उसने राजनैतिक परिदृश्य को उलझाने भर का काम किया। लगभग सभी संभावित उम्मीदवारों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से समय मांगा था लेकिन उम्मीदवारी पर बातचीत के लिए प्रभारी अंबिका सोनी के साथ सिर्फ मुख्यमंत्री हरीश रावत को ही बुलाया गया। तभी राज्य के नेताओं को लगने लगा था कि उनकी दावेदारी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
पार्टी के भीतर बढ़ेगा असंतोष
अनूप वाजपेयी, देहरादून
उत्तराखंड से जुड़े उम्मीदवारों को कहीं न कहीं इस बात का अंदेशा था कि इस बार पार्टी आलाकमान किसी बाहरी को उम्मीदवार बना सकता है। इसका एक कारण बड़ी संख्या में दिल्ली में खाली बैठे कांग्रेस नेता हैं। लिहाजा देहरादून से दिल्ली तक जमकर लॉबिंग भी हुई।
यही कारण है कि कांग्रेस में राजबब्बर की उम्मीदवार की जानकारी लगभग सभी बड़े नेताओं को थी लेकिन अधिकारिक तौर पर सब इंकार करते रहे। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कैंप के जो नेता उनकी उम्मीदवारी को लेकर अंतिम समय दावे कर रहे थे वे अब कह रहे हैं कि न तो उनकी ओर से कोई लॉबिंग की गई और न ही उनकी ओर से कोई दावा पेश किया गया।
पहला मौका है जब कांग्रेस केकेंद्रीय नेतृत्व और न ही राज्य स्तर पर सोमवार देर रात तक उम्मीदवार की अधिकृत घोषणा की गई। जबकि पिछली बार मनोरमा डोबरियाल शर्मा की उम्मीदवारी तय होते ही खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत ने घोषणा की थी। उम्मीदवारी को लेकर पार्टी में विरोध न हो शायद इसी रणनीति के तहत नेताओं ने चुप्पी साधे रखी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी देर रात तक कहते रहे कि उनके पास उम्मीदवार की कोई अधिकृत सूचना नहीं है। दूसरी ओर सीएम खेमे की ओर से राजबब्बर के नामांकन की गुपचुप तैयारियां चल रही थीं लेकिन किसी को भनक नहीं लगने दी गई। माना जा रहा है कि राज बब्बर की उम्मीदवारी तय होने के बाद दूसरे दावेदार विरोध न दर्ज कराएं इस लिए सबकुछ नामांकन के आखिरी दिन के लिए छोड़ दिया गया।
बाहरी उम्मीदवारी से पार्टी में असंतुलन
विजय बहुगुणा के करीबी अब कह रहे हैं कि इस बार उनकी ओर से कोई दावेदारी नहीं की गई थी और न ही बहुगुणा ने किसी प्रकार की लॉबिंग की। ये तय है कि बाहरी उम्मीदवारी से पार्टी में संतुलन की बिगड़ी राजनीति और गड़बड़ाएगी। बहुगुणा खेमा एक बार फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल का पुराना राग छेड़ सकता है।
प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को राज्यसभा भेजने के लिए सीएम खेमा भी एक हद तक तैयार था। सीएम गुट चाहता था कि टिहरी विधानसभा को लेकर मंत्री दिनेश धनै और किशोर उपाध्याय के बीच का मतभेद राज्यसभा की उम्मीदवारी से हल हो सकता है। अब किशोर उपाध्याय समर्थक एक बार फिर सीएम के पुराने चहेते दिनेश धनै से दो-दो हाथ के लिए तैयार होंगे।
राजबब्बर की पृष्ठभूमि
पिता - कुशल कुमार बब्बर
जन्म तिथि - 23 जून 1952
जन्म स्थान - आगरा (उत्तर प्रदेश)
शैक्षिक योग्यता - राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय नई दिल्ली से स्नातक
राजनीतिक कैरियर
1994 में सपा से राज्यसभा सदस्य चुने गए।
1999 में आगरा से सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते।
2004 में आगरा से ही पुन: लोकसभा का चुनाव जीते।
2008 में सपा से नाता तोड़ कांग्रेस ज्वाइन की।
2009 में फिरोजाबाद से लोकसभा का उप-चुनाव लड़े और मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू डिम्पल यादव को हराया।
2014 में कांग्रेस के टिकट पर गाजियाबाद से भाजपा के वीके सिंह से लोकसभा चुनाव हारे।