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सलाम: कुत्तों की बढ़ती आबादी रोकने का इनका तरीका है बेमिसाल

Fri, 08 Jan 2016 03:29 PM IST
गौरव मिश्रा/अमर उजाला, देहरादून
गौरव मिश्रा/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 08 Jan 2016 03:29 PM IST
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rahat organization doing good work on dogs population control.

देहरादून शहर की सड़कों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी लोगों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है। इनकी आबादी को नियंत्रित करने की दिशा में नगर निगम कुछ नहीं कर रहा है। ऐसे में बिना किसी सरकारी अनुदान के दान पर चलने वाली पशु प्रेमी संस्था राहत (पशु आश्रय एवं चिकित्सालय) आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण करने की दिशा में शानदार काम कर रही है। बीते 10 सालों में यह संस्था सात हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी कर चुकी है।

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ननूरखेड़ा तपोवन स्थित राहत पशु आश्रय व चिकित्सालय की वरिष्ठ सदस्य मानवी भट्ट का कहना है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम यानी एबीसी वक्त की जरूरत है। अगर कुत्तों की आबादी बढ़ रही है तो इसके लिए हमें हस्तक्षेप करना चाहिए। कुत्तों (मादा) के नसबंदी के तमाम फायदे होते हैं। इसलिए हम मादा नसबंदी पर अधिक जोर देते हैं। हमारा टारगेट हर माह कम से कम सौ कुत्तों की नसबंदी करने का रहता है।
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उन्होंने बताया कि सौ कुत्तों की नसबंदी पर एक माह में कम से कम एक हजार रुपये का खर्चा आता है। अच्छी दवाएं, मानव संसाधन, वाहन-तेल तथा श्वान के खानपान का खर्चा इसमें शामिल है। फिलहाल यह कार्य तो दान पर चल रहा है।

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कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने को करें यह काम

rahat organization doing good work on dogs population control.

- अपने इलाके में रहने वाले आवारा कुत्तों की नसबंदी कराएं
-राहत संस्था को कुत्तों को चिकित्सालय तक ले जाने में सहयोग करें
-सड़कों पर रहने वाले कुत्तों को दस से पंद्रह दिन रखता है राहत
-आपरेशन के बाद संस्था कुत्तों को मुहल्ले में वापस छोड़ देती है

एक धेला नहीं देती सरकार
राहत पशु आश्रालय एवं चिकित्सालय सामुदायिक-निजी दान (डोनेशन) पर चलता है। फिलहाल इसका मासिक खर्चा सवा लाख रुपये प्रतिमाह से अधिक है। सरकार व सरकारी संस्थाओं से राहत को एक धेला भी नहीं मिलता। हालांकि दस वर्ष पहले नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी को पांच लाख रुपये दिए थे। उसके बाद से सरकार खामोश है। वहीं, हेल्प एनिमल्स इंडिया अमेरिकी संस्था है जो राहत को अपेक्षाकृत ठीक-ठाक वित्तीय सहायता देती है।

आबादी नियंत्रण कार्यक्रम में तिब्बती आगे
कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने में तिब्बती समुदाय का रवैया सकारात्मक है। कुत्तों के नसबंदी अभियान (स्टरलाइजेशन कैंपेन) देहरादून में सामुदायिक सहभागिता में तिब्बती सबसे आगे हैं। यह लोग नसबंदी अभियान के साथ ही बीमार, चोटिल, घायल कुत्तों की सेवा करने में भी आगे हैं।

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