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रघुवीर और जनक बंजर जमीन में उगा रहे गुलदाउदी के फूल
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खतार गांव में गुलदाउदी के फूलों की खेती करती महिलाएं।
- फोटो : VIKAS NAGAR
सुुनील तोमर, नागथात। इन दिनों कालसी तहसील के खतार गांव के बंजर खेत गुलदाउदी फूलों से गुलजार है। गांव में बड़े पैमाने पर इस फूल की खेती की जा रही है। जिसे काश्तकार महंगे दाम पर आगे बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। इससे काश्तकारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
करीब एक वर्ष पूर्व एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत हार्क संस्था ने ग्रामीणों को इस फूल के पौधे उपलब्ध कराए थे। जिससे अब काश्तकार मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। 115 रुपये प्रति किलो की दर से बाजार में बिकने वाले इस फूल का इस्तेमाल सजावट के साथ ही कीटनाशक बनाने में किया जाता है। बीते एक साल में काश्तकार लाखों रुपये के फूल को बाजार में बेच चुके हैं
भदराज देवता उत्पादक समूह की अध्यक्षा शीला देवी, कोषाध्यक्ष सुशीला देवी ने बताया कि बंजर भूमि पर भी इस फूल की खेती की जा सकती है। इसकी खेती के लिए पानी की बहुत कम जरूरत होती है। पशु भी इस फुल को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। कई काश्तकार अब अपने बंजर खेतों में इस फूल की खेती कर रहे हैं।
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एक फसल से करीब चार बार लाभ लिया जा सकता है। अब तक गांव के काश्तकार इस फसल से दूसरी बार लाभ ले रहे हैं। संस्था के माध्यम से ही काश्तकार इस फूल की सप्लाई को आगे बेचते हैं। ग्रामीणों की देखादेखी कुईथा गांव में भी इस फसल की खेती शुरू की जा चुकी है। कुईथा के रघुवीर सिंह, जनक सिंह का कहना है कि हाल ही में उन्होंने इस फूल की खेती शुरू की है। अब तक वह करीब 5000 रुपये के फूल को बेच चुके हैं। कम लागत में यह फसल काश्तकारों को अधिक मुनाफा दे रही है।
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करीब एक वर्ष पूर्व एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत हार्क संस्था ने ग्रामीणों को इस फूल के पौधे उपलब्ध कराए थे। जिससे अब काश्तकार मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। 115 रुपये प्रति किलो की दर से बाजार में बिकने वाले इस फूल का इस्तेमाल सजावट के साथ ही कीटनाशक बनाने में किया जाता है। बीते एक साल में काश्तकार लाखों रुपये के फूल को बाजार में बेच चुके हैं
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भदराज देवता उत्पादक समूह की अध्यक्षा शीला देवी, कोषाध्यक्ष सुशीला देवी ने बताया कि बंजर भूमि पर भी इस फूल की खेती की जा सकती है। इसकी खेती के लिए पानी की बहुत कम जरूरत होती है। पशु भी इस फुल को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। कई काश्तकार अब अपने बंजर खेतों में इस फूल की खेती कर रहे हैं।
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एक फसल से करीब चार बार लाभ लिया जा सकता है। अब तक गांव के काश्तकार इस फसल से दूसरी बार लाभ ले रहे हैं। संस्था के माध्यम से ही काश्तकार इस फूल की सप्लाई को आगे बेचते हैं। ग्रामीणों की देखादेखी कुईथा गांव में भी इस फसल की खेती शुरू की जा चुकी है। कुईथा के रघुवीर सिंह, जनक सिंह का कहना है कि हाल ही में उन्होंने इस फूल की खेती शुरू की है। अब तक वह करीब 5000 रुपये के फूल को बेच चुके हैं। कम लागत में यह फसल काश्तकारों को अधिक मुनाफा दे रही है।