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Uttarakhand: उठ रहे सवाल, किस आधार पर दिए नगर निकायों में ईओ के प्रभार, विभाग के पास नहीं कोई फार्मूला

Sat, 25 Jul 2026 04:05 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: Renu Saklani Updated Sat, 25 Jul 2026 04:05 PM IST
सार

नगर निकायों में प्रभारी अधिशासी अधिकारियों (ईओ) की नियुक्तियों को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को ईओ का प्रभार दिए जाने के पीछे अपनाए गए मानकों को लेकर शहरी विकास विभाग घिरता नजर आ रहा है।

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Questions Raised Over Criteria for Appointing Acting Executive Officers in Uttarakhand Urban Local Bodies
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

नगर निकायों में क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक, अकाउंट कर्मचारियों को प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) किस आधार पर बनाया, इसका जवाब देने से शहरी विकास निदेशक कतरा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि 18 प्रभारी ईओ के चयन का पैमाना क्या है।

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शहरी विकास विभाग ने हाल ही में नौ स्थायी ईओ को नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त बनाते हुए कुल 18 क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक, अकाउंट कर्मचारियों को नगर पालिका और नगर पंचायतों में प्रभारी ईओ बना दिया था। शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने बताया था कि यह व्यवस्था पूर्व से चली आ रही है। लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि इन प्रभारी ईओ के चयन का पैमाना क्या है।

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वरिष्ठ होते हुए भी अपने मूल कार्यों में ही लगे कई 
अगर चयन का पैमाना वरिष्ठता है तो इनमे से तमाम ऐसे कर्मचारी हैं, जो वरिष्ठता सूची में बेहद निचले पायदान पर हैं। एक तो वरिष्ठता सूची में 177 वें स्थान पर है। एक प्रभारी ईओ अपने संवर्ग में 56वें स्थान पर हैं। तमाम सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक ऐसे हैं जो वरिष्ठ होते हुए भी अपने मूल कार्यों में ही लगे हुए हैं।

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सवाल उठ रहे हैं कि शहरी विकास विभाग ने पिक एंड चूज की नीति अपनाते हुए मनमर्जी से अपने लोगों को प्रभारी ईओ बनाया है। सवाल पूछने के लिए अपर सचिव एवं निदेशक शहरी विकास विनोद गिरी गोस्वामी को फोन, मैसेज, वॉट्सएप मैसेज किया गया लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला। जब आएगा तो प्रकाशित किया जाएगा।

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68 प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी हैं उपलब्ध

शहरी विकास निदेशालय के पास वर्तमान में 68 निकाय प्रशासनिक संवर्ग के अधिकारी उपलब्ध हैं। इनमें से 15 से अधिक ऐसे हैं, जिन्हें नियुक्ति नहीं दी गई। इनके बजाय अन्य संवर्गों के कनिष्ठ क्लर्क, सफाई निरीक्षकों, कर अधीक्षकों को प्रभारी ईओ बनाया गया है। अंदरखाने विभागीय अफसर इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि एक ईओ को दो छोटे निकायों का चार्ज दिया जा सकता है।
 

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