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'बेरहम' सरकार की एक और कारस्तानी

Mon, 11 Nov 2013 01:05 PM IST
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 11 Nov 2013 01:05 PM IST
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protesters upset because of uttarakhand government

उत्तराखंड के युवाओं को आंदोलन के जरिए रोजगार और पक्की नौकरी मांगना महंगा पड़ रहा है।

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सुध नहीं ले रही सरकार
आंदोलन के दौरान कोर्ट-कचहरी के चक्कर में फंसे ये युवा अपने चहेतों के मुकदमे वापस लेने वाली सरकार से रहम की भीख मांग रहे हैं, लेकिन कोई उनकी सुध लेने वाला नहीं।

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आर्थिक तंगी के चलते इनका हौसला अब टूटता जा रहा है। सरकार ने हाल ही में अपने कई चहेतों के संगीन मुकदमे वापस ले लिए जबकि अन्य आंदोलनकारियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
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खराब हुआ हाथ

पूर्ण सिंह राणा निवासी क्वां डूडा उत्तरकाशी ने देहरादून में 22 जनवरी वर्ष 2010 में शिक्षा आचार्य से शिक्षा मित्र में समायोजन की मांग को लेकर खुद पर मिट्टी तेल छिड़कर आत्मदाह का प्रयास किया था। तब वह बुरी तरह से झुलसने से तीन महीने तक दून अस्पताल में भर्ती रहे।

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इनका बांया हाथ झुलसने से हमेशा के लिए खराब हो चुका है। इनके खिलाफ आत्मदाह के प्रयास सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने से इन्हें अब हर माह उत्तरकाशी से दून कोर्ट के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।


जीवन मेहरा निवासी घनाड चौखुटिया अल्मोड़ा ने अपने कुछ साथियों के साथ नौकरी की मांग को लेकर 29 फरवरी वर्ष 2008 को विधानसभा कूच किया था। इस बीच बैरिकेडिंग पार करने के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों की धक्का मुक्की हुई थी।

इस मामले में पुलिस ने जीवन सहित 10-15 अन्य के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। अब इन लोगों को अल्मोड़ा से दून आने में दो दिन का सफर तय करना पड़ता है। जीवन बताते हैं कि पहले ही घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है ऊपर से वकीलों का खर्चा। उनका कहना है कि सरकार शिक्षा मंत्री का मुकदमा वापस ले सकती है तो हमारा भी केस हटाए।

चल रहा है मुकदमा
पंकज सैनी निवासी हरिद्वार आठ नवंबर वर्ष 2009 को हरिद्वार मार्ग स्थित प्रसार भारती के टावर पर चढ़ गए थे। उनकी मांग थी कि सरकार शिक्षा आचार्यों को शिक्षा मित्र में समायोजित करे। अब इनके खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा चल रहा है।

इसके अलावा हाल ही में उत्तरकाशी में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और अब 74 शिक्षा आचार्यों के खिलाफ शांति भंग का मामला दर्ज किया गया है।

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