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OROP के पक्ष में पूर्व सैनिकों ने लौटाए पदक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 17 Nov 2015 12:00 PM IST
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केंद्र सरकार की वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए जारी अधिसूचना के विरोध में उत्तराखंड के पूर्व सैनिकों ने आंदोलन को धार देते हुए वीरता पदक लौटा दिए।
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ओआरओपी में संशोधन की मांग के समर्थन में प्रदर्शन किया और चालीस पूर्व सैनिकों ने मेडल राष्ट्रपति को लौटाने के लिए यूनाइटेड फ्रंट आफ एक्ससर्विसमैन को सौंपे। ओआरओपी की अधिसूचना से नाराज पूर्व सैनिक संगठन सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे परेड ग्राउंड पर जुटे।
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मेजर जनरल लालजी डी सिंह (रि), मेजर जनरल सी नंदवानी (रि), ब्रिगेडियर विजय कुमार (रि) ने पूर्व सैनिकों को अधिसूचना के प्रावधानों की जानकारी दी। फ्रंट के मीडिया प्रभारी ब्रिगेडियर केजी बहल (रि) ने बताया कि ओआरओपी पर उनकी पांच मांगों को नहीं माना गया है। इसके विरोध में आंदोलन जारी रहेगा।
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सबसे पहले मेजर चौधरी ने दिया मेडल
मेडल वापस करने वालों में सबसे पहले मेजर डी चौधरी (रि) रहे। कई जेसीओ और अन्य सैनिक रैंक के पूर्व सैनिकों ने मेडल लौटाए। मेडल लौटाने वालों में चालीस पूर्व सैनिक थे, जिसमें पांच वीर नारियां भी शामिल हैं। अन्य पूर्व सैनिक अपने पदक उत्तराखंड पूर्वसैनिक लीग के कार्यालय में दे सकते हैं। जहां से लीग पदकों को राष्ट्रपति भवन भेजेगी।
अधिसूचित फार्मूला मंजूर नहीं
एक रैंक पर अभी जारी हो रही अधिकतम और न्यूनतम पेंशन का औसत निकालकर उसे देने की बात पूरी तरह से गलत है।
प्रीमैच्योर रिटायरमेंट की शर्त अनुचित है। इससे 45 प्रतिशत पूर्व सैनिक ओआरओपी से वंचित रहेंगे। पांच वर्ष का रिव्यू करना वन रैंक वन पेंशन नहीं है। हर वर्ष पेंशन रिव्यू होनी चाहिए या फिर कम से कम दो वर्ष में होनी चाहिए।
लागू करने की तिथि का विरोध। केंद्र के जुलाई 2014 से लागू करने की बजाय अप्रैल 2014 से लागू करना चाहते हैं पूर्वसैनिक।
मेडल लौटाना वीरता पदकों का अपमान
पर्सनल बिलो आफिसर रैंक संगठन ने यूनाइटेड फ्रंट आफ एक्ससर्विमैन के मेडल लौटाने के फैसले को सैन्य मैडलों का अपमान बताया है। संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष पीटीआर शमशेर सिंह बिष्ट (रि) ने कहा फ्रंट में पूर्व सैन्य अधिकारियों का वर्चस्व है जिससे वह पूर्व सैनिकों पर अपनी बातें थोप रहे हैं।
वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर अफसर सैनिकों के कंधे पर बंदूक रखकर अपने हितों को साधना चाहते हैं। वास्तव में वन रैंक वन पेंशन के वास्तविक हकदार अधिकारी वर्ग से नीचे के सैनिक हैं क्योंकि ये 40 से 45 की आयु में रिटायर होते हैं। सरकार की नोटिफिकेशन को सैन्य अधिकारियों ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है।
पूर्व सैनिक को भड़काकर वीरता मेडल वापस कराने में आमादा है। पूर्व सैनिकों को ज्ञान होना चाहिए की अपनी वीरता में प्राप्त मेडल को लौटाना व जलाना वीरता का अपमान है।
नैतिक तौर पर उचित नहीं
राज्य सैनिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल गंभीर सिंह नेगी (रि) ने कहा कि ओआरओपी की अधिसूचना का वह भी विरोध कर रहे हैं, लेकिन मेडल लौटाने को नैतिक तौर पर उचित नहीं मानते। उन्होंने कहा कि केंद्र ने पूर्व सैनिकों के साथ अन्याय किया है। चालीस वर्ष से जिस ओआरओपी के लिए वह संघर्ष कर रहे उसमें मनमाने ढंग से फेरबदल कर दिया, जिसके खिलाफ आंदोलन जायज है।