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उमा की दो टूक, सबसे पहले पुरोहितों की सुनूंगी

Wed, 17 Sep 2014 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 17 Sep 2014 02:10 AM IST
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privilege to purohit in kedarnath, says uma bharti.

केदारनाथ धाम के पुनर्वास के संबंध में बेशक वैज्ञानिक राय सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो, बेशक इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान पहुंची हों और तकरीबन घंटा भर बैठक भी की हो, लेकिन इस मसले पर उनकी सबसे ज्यादा तरजीह तीर्थ पुरोहितों को ही मिलने वाली है।

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संस्थान में बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उमा ने अपना दृष्टिकोण साफ भी कर दिया। दो टूक कहा कि केदारनाथ को 1882 का स्वरूप लौटाने की कड़ी में सबसे पहले यहां के तीर्थ पुरोहितों से बात होगी।
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उसके बाद मंदिर समिति, राज्य सरकार, संस्कृति, पर्यटन मंत्रालय के साथ वाडिया, एफआरआई जैसे संस्थान इस पर साथ मिलकर काम करेंगे।

मंगलवार को दून दौरे के दौरान जीएमएस रोड स्थित वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान पहुंची उमा भारती ने केदारनाथ का विकास लेकर अपना दृष्टिकोण साफ किया।

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वैष्णो देवी के जैसा विकसित हो केदारनाथ

privilege to purohit in kedarnath, says uma bharti.

उमा ने कहा कि इसे वैष्णो देवी के तर्ज पर विकसित किए जाने की जरूरत है, जहां विकास से तीर्थ पुरोहितों के लिए पुन: रोजगार के बहुसंख्य द्वार खुले हैं।

केदारनाथ को लेकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), वन के साथ ही संस्कृति मंत्रालय और राज्य सरकार के साथ एकीकृत प्लान तैयार किए जाने की बात दोहराई ताकि रोजगार बढ़े, तीर्थ पुरोहितों के लिए रोजगार बढ़े और मूल स्थान अपने पुराने स्वरूप में लौटे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता यही है कि विकास ऐसा हो, जिससे यात्रियों को असुविधा न हो, मूल स्थान से कोई छेड़छाड़ न हो।

मोदी के ग्रोथ-एंप्लायमेंट मंत्र का जिक्र करते हुए इसमें वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान, वन अनुसंधान संस्थान जैसे संस्थानों को भी इस संबंध में मार्गदर्शक करार दिया। हिमनद प्राधिकरण को बेहद जरूरी बताया। इस दौरान राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक, मशहूर पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट आदि भी उपस्थित रहे।

नमामि गंगे पर कुछ बोलने से इनकार

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केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती नमामि गंगे के एक्शन प्लान से जुड़े सवाल पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। कहा कि एक्शन प्लान यह है कि कुछ बोलेंगे नहीं। तैयारी के साथ काम होगा तो जवाब खुद मिल जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के गंगा की सफाई के प्लान के संबंध में की गई टिप्पणी संबंधी सवाल पर कहा कि वह टिप्पणी 1985 की यानी 29 साल पुरानी याचिका पर थी। यह टिप्पणी साफ है पुरानी सरकार की कार्यप्रणाली पर थी। तब से अब तक गंगा की सफाई को लेकर कुछ नहीं किया गया।

गंगोत्री का रिट्रीट ट्रेंड देखा
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के म्यूजियम का भ्रमण भी किया। ग्लेशियरों के पिघलने की दर से जुड़ा एक प्रेजेंटेशन भी उनके सामने रखा गया। संस्थान के ग्लेशियोलाजिस्ट डॉ. डीपी डोभाल ने स्लाइड के माध्यम से गंगोत्री ग्लेशियर का 1891 से लेकर 2012 तक रिट्रीट ट्रेंड प्रदर्शित किया।

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