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Dehradun News: श्रीदेव सुमन विवि के खिलाफ आंदोलन करेंगे निजी कॉलेज संचालक
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श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के खिलाफ निजी कॉलेज संचालकों ने आंदोलन का एलान किया है। संचालकों ने विवि पर संबद्धता शुल्क के नाम पर मनमानी का आरोप लगाया है। इसके चलते संस्थानों की संबद्धता अटक गई है।
इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश भर के निजी कॉलेज संचालकों की ओर से भानियावाला स्थित एक होटल में बैठक की गई। वक्ताओं ने कहा, विवि की ओर से पिछले सत्रों से संस्थानों से अनावश्यक संबद्धता शुल्क की मांग की जा रही है। इतना ही नहीं वर्षों से संबद्धता प्रमाण पत्र जारी न होने से उन्हें समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। निजी कालेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डाॅ. सुनील अग्रवाल ने कहा, पिछले कई वर्षों से संबद्धता विस्तारण प्रमाण पत्र जारी न होने से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है और कॉलेज नैक जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। वहीं इस मौके पर यूजीसी के नियमों के अनुसार वर्ष में दो बार प्रवेश की व्यवस्था लागू न किए जाने पर भी गहरी नाराजगी जताई। कहा, एक समय सरकार निजी कॉलेजों को बढ़ावा देना चाहती थी, लेकिन अब प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने के बाद शासन और विश्वविद्यालय का रवैया निजी कालेजों के प्रति असहयोगपूर्ण हो गया है। चेतावनी देते हुए कहा, जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो निजी संस्थान उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। बैठकक में देहरादून समेत हरिद्वार, रुड़की और गढ़वाल के 42 कॉलेज के संचालक मौजूद रहे।
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इस संबंध में बृहस्पतिवार को प्रदेश भर के निजी कॉलेज संचालकों की ओर से भानियावाला स्थित एक होटल में बैठक की गई। वक्ताओं ने कहा, विवि की ओर से पिछले सत्रों से संस्थानों से अनावश्यक संबद्धता शुल्क की मांग की जा रही है। इतना ही नहीं वर्षों से संबद्धता प्रमाण पत्र जारी न होने से उन्हें समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। निजी कालेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डाॅ. सुनील अग्रवाल ने कहा, पिछले कई वर्षों से संबद्धता विस्तारण प्रमाण पत्र जारी न होने से छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है और कॉलेज नैक जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। वहीं इस मौके पर यूजीसी के नियमों के अनुसार वर्ष में दो बार प्रवेश की व्यवस्था लागू न किए जाने पर भी गहरी नाराजगी जताई। कहा, एक समय सरकार निजी कॉलेजों को बढ़ावा देना चाहती थी, लेकिन अब प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ने के बाद शासन और विश्वविद्यालय का रवैया निजी कालेजों के प्रति असहयोगपूर्ण हो गया है। चेतावनी देते हुए कहा, जल्द समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो निजी संस्थान उच्च न्यायालय की शरण लेंगे। बैठकक में देहरादून समेत हरिद्वार, रुड़की और गढ़वाल के 42 कॉलेज के संचालक मौजूद रहे।
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