डीजल के रेट घटे, लेकिन किराया कब घटेगा?
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बीते एक माह में डीजल की कीमतें पांच रुपए प्रति लीटर तक घटने के बावजूद सिटी ट्रांसपोर्ट यूनियनें देहरादून की जनता को राहत देने के मूड में नहीं हैं।
न सिटी बस, न विक्रम यूनियन और न रोडवेज प्रबंधन, किसी ने किराया घटाने की मंशा नहीं दिखाई है। डीजल के दामों में बढ़ोतरी पर हो-हल्ला मचाने वाले ट्रांसपोर्ट यूनियन वालों की चुप्पी शहरियों को खलने लगी है।
हालांकि आरटीओ ने दावा किया है कि किराया घटाने संबंधी मामला राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) में ले जाया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के बाद देश में डीजल के दाम कई बार घटाए जा चुके हैं।
पहले जब भी डीजल दाम बढ़े हैं, सिटी ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने एसटीए पर किराया बढ़ाने का दबाव डाला। सन 2012 में विक्रम और सिटी बसों के साथ रोडवेज का किराया बढ़ाया गया।
इसके बाद डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का हवाला देते हुए दोबारा रोडवेज बसों का किराया बढ़ाया गया। बीती अक्टूबर और नवंबर के पहले सप्ताह तक डीजल के दाम पांच रुपए तक गिर चुके हैं।
रोडवेज में बढ़ा सबसे ज्यादा किराया
अब डीजल करीब 57 रुपए प्रति लीटर है। एक माह में सात रुपए तक गिरावट के बावजूद किसी ने किराया घटाने की पेशकश नहीं की।
एक रुपए डीजल बढ़ने पर रोडवेज सबसे पहले किराया बढ़ाता है। मगर डीजल के दाम करीब पांच रुपए तक गिरने के बावजूद किराया नहीं घटाया गया।
2012 में डीजल रेट लगभग 39 रुपए प्रति लीटर था, तब से रोडवेज में किराये की हर श्रेणी में 30 से 40 रुपए बढ़ चुके हैं। रोडवेज विशेषज्ञों के अनुसार, अब डीजल करीब सात रुपए नीचे गिर चुका है तो किराये में कुछ राहत देनी चाहिए।
किराया तय करना एसटीए के कार्यक्षेत्र में आता है। इस संबंध में अन्य यूनियनों से बात की जाएगी।
- संदीप सैनी, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन)