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फुटकर बाजार में आसमान छू रहे दाम
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 27 Jul 2013 09:27 AM IST
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सब्जियों के आसमान छूते दामों ने घर-घर का बजट बिगाड़ दिया है। कुछ ही दिनों में दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी सुनते ही सब्जी न खाने में भलाई समझता है। इस महंगाई के पीछे मुनाफाखोरी का गणित है। मंडी और फुटकर के दामों में भारी अंतर इस बात को साबित करता है।
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फुटकर बाजार के मुकाबले मंडी समिति में थोक रेट दो से तीन गुना कम हैं। आपदा के बाद पहाड़ों से सब्जियों की आवक बंद होना मुनाफाखोरों के लिए फायदा का सौदा साबित हो रहा है। आपदा के नाम पर सब्जियां मुंह मांगें दामों पर बिक रही हैं। मसलन मंडी में 12 रुपये किलो बिकने वाली लौकी ठेली तक पहुंचते-पहुंचते 40 रुपये किलो हो जाती है।
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कमीशन जुड़ने से सब्जी के रेट बढ़ जाते हैं
सब्जियों की आवक पहले के मुकाबले कम जरूर है, लेकिन इतनी नहीं जितनी बताई जा रही है। मंडी में मौजूद मासाखार भी मुसीबत का कारण बने हुए हैं। मासाखोर मंडी में आढ़तियों से सब्जी खरीदकर ठेली और दुकान संचालकों को बेचते हैं। इनका कमीशन जुड़ने के कारण सब्जी के रेट बढ़ जाते हैं।
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सब्जियों के रेट की तुलना (रुपये प्रति किलो)
सब्जी - मंडी में - फुटकर में
आलू - 10 - 20-25
प्याज - 20 - 35-40
टमाटर - 18 - 40-50
हरी मिर्च - 22 - 60-80
लौकी - 12 - 35-40
तोरई - 08 - 25-30
फ्रासबीन - 20 - 40-45
अरबी - 15 - 35-40
खीरा - 15 - 40-45
करेला - 12 - 35-40
भिंडी - 12 - 40-50
फुटकर बाजार में सब्जी के बढ़ते दामों को लेकर मैंने पिछले हफ्ते ही फुटकर बाजार के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। फुटकर में रेट पर नियंत्रण के लिए हर माह इनकी बैठक के प्रयास किए जा रहे हैं।
- विजय थपलियाल, सचिव मंडी समिति
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