ज्ञानकुंभ: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा - देश की प्रगति के लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा जरूरी
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पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय ज्ञानकुंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उद्घाटन किया। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि देश के समग्र विकास के लिए गुणवत्तायुक्त शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में बेहतरी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन और शिक्षकों के पास है। प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें तराशने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने कहा कि नैतिकता, ईमानदारी और प्रमाणिकता से शिक्षा में सुधार किया जा सकता है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को पतंजलि योगपीठ में उत्तराखंड सरकार और पतंजलि की ओर से आयोजित दो दिवसीय ज्ञानकुंभ का उद्घाटन करते हुए समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती। शिक्षा से ही देश और समाज का समग्र विकास संभव है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि देश की शिक्षा को और ज्यादा गुणवत्तापरक बनाने के लिए यह आयोजन किया गया और उम्मीद जताई कि इस विचार मंथन से सार्थक परिणाम निकलेंगे। जो देश की शिक्षा को और उच्च मानदंड प्रदान करेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूचि में शिक्षा को अनिवार्य स्थान दिया गया है। यह केंद्र और राज्यों दोनों की जिम्मेदारी है कि वह अपने यहां बेहतर शैक्षिक माहौल बनाए, लेकिन उच्च शिक्षा में गुणवत्ता की अहम जिम्मेदारी प्रबंधकों और शिक्षकों पर ज्यादा है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के अंदर कोई न कोई प्रतिभा जरूर होती है। शिक्षकों को चाहिए कि वह इस प्रतिभा को पहचाने और उसे विकसित करे। राष्ट्रपति ने बच्चों को ज्ञान देने के साथ ही संस्कार देने की बात भी कही और उम्मीद जताई कि इस ज्ञानकुंभ से निकलने वाले अमृत के बल पर हम अपनी शैक्षिक व्यवस्था को विश्व स्तरीय मानदंड दे सकेंगे।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को सवा नौ बजे जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने राष्ट्रपति की आगवानी करते हुए स्वागत किया। राष्ट्रपति नौ बजकर 35 मिनट पर हरिद्वार के लिए चले गए। वायुसेना के विशेष विमान से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शनिवार को दिल्ली से जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर आए। एयरपोर्ट पर गर्वनर बेबी रानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, डीजीपी अनिल रतूड़ी ने स्वागत किया। स्वागत की औपचारिकताओं के बाद राष्ट्रपति हेलीकाप्टर से नौ बजकर 35 मिनट पर हरिद्वार के लिए उड़ान भरी। रविवार को राष्ट्रपति की दिल्ली के लिए वापसी होगी। राष्ट्रपति के आगमन के दृष्टिगत जौलीग्रांट एयरपोर्ट के पास अंदर बाहर कड़ी सुरक्षा के प्रबंध किए गए थे। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। खुफिया विभाग भी पूरी तरह से सक्रिय रहा था। रविवार को वापसी के लिए भी प्रशासन की ओर से तैयारियां की गई हैं।
देशभर के शिक्षा संस्थानों के लिए एक नया रास्ता खुलेगा
उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्या ने ज्ञानकुंभ के आयोजन को सकारात्मक सोच की पहल बताया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह ज्ञानकुंभ उच्च शिक्षा की परिपाटी को बदलेगा। उन्होंने कहा कि सैकड़ों साल पूर्व भारत में नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। आज तकनीक का समय है। समय की आवश्यकता को देखते हुए तकनीक पर आधारित और रोजगारपरक शिक्षा देने को प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत को समग्र भाषाओं की जननी बताते हुए संस्कृत के प्रोत्साहन पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ज्ञानकुंभ के आयोजन से आज का दिन ऐतिहासिक बन गया है।
उत्तराखंड को शिक्षा के लिहाज से बेहद सकारात्मक प्रभाव वाली धरती बताते हुए मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि यहां होने वाले मंथन के लिए देश भर के शिक्षण संस्थानों के लिए एक नया रास्ता निकलेगा, जो आने वाल पीढ़ियों के लिए लाभकारी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में 930 विश्वविद्यालय और 39 हजार से ज्यादा महाविद्यालय हैं। इसके बावजूद हमारे यहां उच्च शिक्षा का स्तर विदेशों की तुलना में काफी नीचे हैं। खासतौर पर हमे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को सुधारना होगा। देश में शोध को और ज्यादा बढ़ावा देने की जरूरत बताई।
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि बेहतर शिक्षा के माध्यम से हमें भारत को वैभवशाली बनाना है। यह हमारा सौभाग्य है कि प्रयागराज में होने वाले महाकुंभ से पहले हमें इस ज्ञानकुंभ के आयोजन का मौका मिला। इस ज्ञानकुंभ से देश में एक नए प्रकाश का आरोहण होगा। उन्होंने कहा कि हमने योग की क्रांति की है और अब ज्ञान की क्रांति की जाएगी जिससे भारत का डंका पूरी दुनिया में बजेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि आज देश की उच्च शिक्षा में सुधार की काफी आवश्यकता है। इसलिए इस महाआयोजन का निर्णय लिया गया।
समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उनकी पत्नी सविता कोविंद, नागालैंड के राज्यपाल पीबी आचार्य, और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा, पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण, सांसद भगत सिंह कोश्यारी, टिहरी की सांसद माला राज लक्ष्मी शाह, विधायक आदेश चौहान, सुरेश राठौर, प्रदीप बत्रा, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के अलावा कई राज्यों के शिक्षामंत्री, प्रदेश के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, कई विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद शामिल हुए। संचालन ज्ञानकुंभ के संयोजक और श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डा. यूएस रावत ने किया।
ये हस्तियां हैं शामिल
कार्यक्रम में करीब दो हजार से ज्यादा शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं। ज्ञानकुंभ में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा समेत अनेक अतिविशिष्ट और विशिष्ट अतिथि मौजूद हैं। रविवार को कार्यक्रम का समापन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। यहा कार्यक्रम राज्य सरकार और पतंजलि योगपीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, हिमाचल के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, झारखंड की शिक्षा मंत्री नीरा यादव, मणिपुर के शिक्षा मंत्री थोक चौंग राधेश्याम, हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा, हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, भारत सिंह कोश्यारी सहित योगगुरु बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण आदि।