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प्रेमनगर डकैतीकांड : 400 डॉलर असली, बीच में सब कागज, मोबाइल पर फोटो भेज किया सौदा

Tue, 04 Feb 2025 03:36 PM IST
देहरादून ब्यूरो अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Tue, 04 Feb 2025 03:36 PM IST
सार

सालम ने अपने दोस्त प्रेमनगर के सिपाही इकरार को पूरी कहानी बताई। इस पर सभी तैयार हो गए। उन्होंने बाकी सभी को साथ लिया और ऋषिकेश से ही 400 डॉलर के चार नोट खरीदे।

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Prem Nagar robbery case: 400 dollars were real, all papers were in between, deal was done by sending photo on
जेल गए डकैतीकांड के आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ऋषिकेश के कारोबारी से डकैती के आरोपियों में किसी के पास 20 हजार डॉलर नहीं थे। बल्कि, इसके लिए सिपाही अब्दुल रहमान और मास्टरमाइंड हसीन उर्फ अन्ना ने सुनियोजित षडयंत्र रचा था। आरोपियों के पास केवल 400 डॉलर असली थे। इनके दो नोटों को ऊपर नीचे लगाकर बीच में कागज रखकर दो गड्डियां तैयार की थीं। इन गड्डियों का फोटो लेकर उन्होंने कारोबारी को भेजा और फिर सौदा तय कर लिया। कारोबारी को भी लगा कि आधी कीमत में 17 लाख रुपये के डॉलर मिल रहे हैं तो वह भी तैयार हो गए।

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इस पूरे मामले में रुड़की के जलालपुर गांव का रहने वाला हसीन उर्फ अन्ना मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। हसीन के ही गांव का रहने वाला आईआरबी का सिपाही अब्दुल रहमान उसका अच्छा दोस्त है। दोनों अक्सर देहरादून और अपने गांव में एक साथ ही रहते थे। पिछले दिनों हसीन ने अपने इस पूरे षडयंत्र को अब्दुल रहमान को बताया। अब्दुल भी तैयार हो गया। हसीन ने अब्दुल से कहा कि यदि वह और भी पुलिसकर्मियों को अपने साथ मिला लेगा तो काम आसान हो जाएगा। इस पर अब्दुल ने इसका जिक्र अपने साथी सालम से किया।
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सालम ने अपने दोस्त प्रेमनगर के सिपाही इकरार को पूरी कहानी बताई। इस पर सभी तैयार हो गए। उन्होंने बाकी सभी को साथ लिया और ऋषिकेश से ही 400 डॉलर के चार नोट खरीदे। इन नोटों में से एक-एक नोट उन्होंने ऊपर नीचे लगाकर दो गड्डियां बना दीं। इससे लगा कि 100-100 डॉलर के नोटों की ये 20 हजार डॉलर की गड्डियां हैं।
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इनके फोटो उन्होंने यशपाल असवाल को भेजकर सौदा तय कर लिया। यशपाल गत 31 जनवरी को साढ़े सात लाख रुपये लेकर देहरादून पहुंचे। उस वक्त उनसे मिलने के लिए अब्दुल रहमान वर्दी में पहुंचा। जबकि, सिपाही सालम सादे कपड़ों में था। चूंकि इकरार प्रेमनगर थाने का सिपाही है तो वह क्षेत्र में पुलिस की गतिविधियों के बारे में इन सभी को बता रहा था। इसके बाद पैसों से भरा बैग लूटकर ये सब वहां से अलग-अलग हो गए। पुलिस ने जब इकरार समेत सात लोगों को पकड़ा तो उनमें से अब्दुल के पास से दो लाख 30 हजार रुपये बरामद हुए। जबकि, सोमवार को पकड़े गए हसीन के पास से 1.90 लाख रुपये बरामद हुए। इसके अलावा हसीन ने 30 हजार रुपये अपने साथी प्रेम मोहन को खाते में ट्रांसफर किए थे।

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सिपाही इकरार की संदिग्ध रहीं हैं गतिविधियां
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सिपाही इकरार पहले से संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त रहा है। उसके खिलाफ पहले भी कई तरह की शिकायतें हो चुकी हैं। इनमें से एक मामले में उसकी विभागीय जांच भी हुई थी। हालांकि, इसमें उसे क्लीन चिट मिली या कोई दंड इसके बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है। इसी तरह आईआरबी से बाकी दोनों सिपाहियों की रिपोर्ट भी मंगाई जा रही है।

हत्या के मामले में जेल जा चुका है राजेश
आरोपियों में से राजेश रावत का आपराधिक इतिहास है। वह एक बार हत्या के आरोप में जेल जा चुका है। पुलिस के अनुसार इनमें से एक व्यक्ति पहले नशा तस्करी में भी जेल जा चुका है। पुलिस हिमाचल प्रदेश के रहने वाले आरोपी के आपराधिक इतिहास के बारे में भी जानकारी कर रही है।

एक करोड़ लूटने की बना रहे थे योजना
यशपाल असवाल से लूट की योजना सफल होने के बाद अब आरोपी बड़ा कांड करने की योजना बना रहे थे। पुलिस को आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने एक कारोबारी को इसी तरह डॉलर सस्ते में खरीदने का लालच दिया था। इस बार यह षड्यंत्र एक करोड़ रुपये लूटने का था। हालांकि, इनके पकड़े जाने के बाद उनका यह षड्यंत्र कामयाब नहीं हो पाया।

ढाई लाख रुपये वापस देकर कहा, चले जाओ बताना नहीं किसी से
यशपाल असवाल अपने बैग में साढ़े सात लाख रुपये लेकर पहुंचे थे। आरोपियों ने उनसे रुपयों भरा बैग लूट लिया और इसमें से ढाई लाख रुपये उन्हें तत्काल वापस कर दिए। बताया जा रहा है कि यह रकम उन्होंने इसलिए लौटाई कि कम रकम जाने की वजह से वह किसी को यह बात नहीं बताएंगे। ढाई लाख रुपये वापस देते हुए अब्दुल ने यशपाल से कहा था चले जाओ, किसी को बताना नहीं। यही कारण रहा कि यशपाल असवाल ने पुलिस को सूचना देने में देरी कर दी। इसके बाद जब उन्होंने परिचितों से मशविरा किया तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। हालांकि, ढाई लाख रुपये वापस क्यों दिए, उसका कारण सिर्फ इतना था यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।

विजिलेंस को भी लग गई थी भनक
बताया जा रहा है कि इस तरह की घटना की भनक विजिलेंस को भी लगी थी। हालांकि, उस वक्त तक सूचना थी कि किसी सिपाही ने रिश्वत मांगी है, लेकिन जब तक विजिलेंस इसकी पुष्टि करती तब तक जिला पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

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