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सरकारों की अनदेखी से पिटे पीपीपी के प्रोजेक्ट

Tue, 03 Oct 2017 03:13 PM IST
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 Oct 2017 03:13 PM IST
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PPP mode project flop in uttarakhand
trivendra singh rawat - फोटो : File Photo

उत्तराखंड के पर्यटक स्थलों को रोप-वे के जरिये सुलभ और आकर्षित बनाने का जो सपना प्रदेश सरकार आज दिखा रही है, वह कोई नया नहीं है। पूर्व सरकारें यदि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के प्रोजेक्टों पर कायदे से फोकस करती तो आज सरकार को पर्यटन के क्षेत्र में कोई दूसरा ही सपना बुनना पड़ता। पर्यटन ही नहीं, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, परिवहन, ऊर्जा से जुड़े दर्जनों प्रोजेक्टों के माध्यम से सरकारें विकास का नक्शा बदल सकती थीं, मगर सरकारी तंत्र की अरुचि और उदासीनता से हजारों करोड़ की ये योजनाएं ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं।

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पिछले एक दशक में सरकारों ने 218 प्रोजेक्टों का खाका तैयार किया। इनमें से महज नौ प्रोजेक्ट ही धरातल पर उतारे जा सके। तथ्य बताते हैं कि सरकारों को अलग-अलग कारणों से 139 प्रोजेक्ट निरस्त करने पड़े, जबकि चार प्रोजेक्ट वापस हुए। इस तरह वर्तमान में प्रदेश में निजी सहभागिता से 6382.78 करोड़ रुपये लागत के 75 प्रोजेक्ट हैं, जिन पर त्रिवेंद्र सरकार अब गंभीरता से फोकस कर रही है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही पीपीपी योजना की सरकार नए सिरे से समीक्षा करने जा रही है, जिसमें प्रोजेक्टों के क्रियान्वयन एवं संचालन की नीति को ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा। 
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निजी निवेश के सिवाय कोई विकल्प नहीं
गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही प्रदेश सरकार के पास विकास में निजी निवेश की भागीदारी बढ़ाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं है। बजट का बड़ा हिस्सा राजस्व व्यय की वेतन, भत्तों, पेंशन, अनुदान, मानदेय छात्रवृत्ति व अन्य मदों में खर्च हो जाता है। उसका पूंजीगत व्यय बहुत सीमित है। सरकार जानती है कि पूंजीगत व्यय बढ़ने से बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा। इससे रोजगार के साधन भी विकसित होंगे। प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनाव में दो बड़े वादे किए हैं। ये दो वादे प्रदेश की सुविधाओं में विस्तार व रोजगार के नए अवसर बनाने को लेकर है। 
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आंकड़ों की नजर में पीपीपी प्रोजेक्टों की तस्वीर
प्रोजेक्ट-    संख्या-    लागत 
कुल प्रोजेक्ट-    218-करीब 18 हजार करोड़                    

निरस्त प्रोजेक्ट-139-    
जारी प्रोजेक्ट-    75-    6,382.78 करोड़
पाइपलाइन में-33-    3,311.34 करोड़
क्रियान्वित-    13 -    665.81    करोड़
निविदाएं-    20-    2272.67 करोड़
संचालित-    09-    132.96 करोड़

 दिक्कतें जिनका होना समाधान
- ज्यादातर निजी निवेशक अपनी सुविधा, मुनाफे और रुचि के हिसाब से प्रोजेक्ट देते हैं।
- सरकार प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रोजेक्टों का खाका तैयार कर निवेश के लिए आमंत्रित करेगी।
- निजी सहभागिता के परियोजनाओं को लेकर निवेशक और सरकारी तंत्र में सामंजस्य की कमी, जिसे सुधारा जाएगा।
- ऐसा मॉडल तैयार किया जाएगा ताकि जन सुविधाओं के विस्तार के साथ निजी निवेशक के हित भी सुरक्षित रहे।

सरकार निजी विकास कर्ताओं के साथ कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य करने को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है। पुराने प्रोजेक्टों की नए सिरे से समीक्षा करके उन्हें आज की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा। निजी सहभागिता से जिन प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है, उनकी प्रगति की निरंतर समीक्षा हो रही है।
- अमित सिंह नेगी, सचिव, (नियोजन)

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