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उत्तराखंडः PPP मोड से स्वास्थ्य विभाग 'बीमार'
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 12 Apr 2015 11:56 AM IST
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उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे में पर्वतीय क्षेत्रों पर पीपीपी योजनाएं संचालित करने में सरकार असमंजस में है।
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एक बार तो राज्य सरकार ने इस पर रोक लगाने का निर्णय भी ले लिया था, लेकिन बाद में कदम खींचने पड़े। पीपीपी के तहत स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर कई जगह आक्रोश की स्थिति है। इसके पीछे पीपीपी के तहत संचालित सीएचसी में सही इलाज नहीं होना कारण बताया जा रहा है।
लोगों के आक्रोश को देखते हुए मंत्रिमंडल ने तीन माह पूर्व सभी पर्वतीय जनपदों में पीपीपी योजनाओं पर रोक लगाने का फैसला लिया था, लेकिन बाद में सरकार बैकफुट पर आ गई। वहीं सीएम ने कुमाऊं दौरे के दौरान पहाड़ में स्वास्थ्य पीपीपी नहीं संचालित करने की भी बात कही।
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सीएम हरीश रावत खुद पीपीपी योजनाओं के संचालन पर संबंधित क्षेत्रों से आ रही जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर विभाग से नाराजगी भी जता चुके हैं। सीएम की नाराजगी के बाद विभागीय प्रमुख सचिव को पीपीपी योजनाओं की दिक्कतों पर पत्रकार वार्ता तक बुलानी पड़ी।
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उधर, इसी माह वर्ल्ड बैंक की मदद से गढ़वाल में टिहरी और कुमाऊं में बागेश्वर और अल्मोड़ा जनपद में जिला अस्पताल में पीपीपी सेवाएं संचालित करने की निविदा जारी होनी है। वर्ल्ड बैंक लगभग सात सौ करोड़ रुपये का ऋण राज्य सरकार को दे रहा है, जिसमें पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चयनित तीनों जनपदों में 96 करोड़ से पीपीपी योजना की निविदा जारी की है।
इसके तहत चार वर्ष का समय निर्धारित है जिसमें जिला अस्पताल से लेकर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, बेस अस्पतालों और ट्रामा सेंटरों को जोड़ा जाना है। 13 अप्रैल को इस योजना की निविदा जारी होनी है। ऐसे में सरकार के बार-बार पर्वतीय क्षेत्रों में पीपीपी स्वास्थ्य योजनाओं पर सवाल उठाने से वर्ल्ड बैंक हेल्थ सिस्टम योजना पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह है दिक्कत
स्वास्थ्य महकमे में पीपीपी के तहत 13 मल्टी स्पेशल्टी सचल स्वास्थ्य वैन और 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को संचालित करने की योजना है। हालांकि दोनों योजनाओं में करार के अनुरूप चिकित्सक तैनात नहीं किया जा रहे हैं।
मोबाइल वैन सेवा पर तो शासन स्तर से कई बार जांच हो चुकी है, लेकिन सरकार संचालक कंपनी जैन वीडियो आन व्हील्स कंपनी पर इतनी मेहरबान है कि करार समाप्त होने के बाद कार्य विस्तार दिया जा रहा है।
यही नहीं पीपीपी के तहत संचालित सीएचसी में सही इलाज नहीं मिलने से भी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि आंदोलनरत है। लोहाघाट, चौखुटिया और रायपुर सीएचसी में अनियमितताओं की जांच तक हुई है।