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सरकारी अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में इलाज

Thu, 05 Feb 2015 08:55 AM IST
चंद्रेश पांडे/ अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल)
चंद्रेश पांडे/ अमर उजाला, भीमताल (नैनीताल) Updated Thu, 05 Feb 2015 08:55 AM IST
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power cut in government hospital.

उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर है। गांव में खोले गए अस्पताल अंतिम सांस गिन रहे हैं। नैनीताल जिले के ओखलकांडा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देख आप भी यही कहेंगे।

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इस अस्पताल में मरीजों का इलाज टॉर्च की रोशनी से होता है। यह शर्मनाक स्थिति तब है जब सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रदेशभर में घूम-घूमकर अस्पतालों को ‘ऑक्सीजन’ देने की बात करते नहीं थक रहे।
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मंगलवार शाम पेड़ से गिरकर घायल हुई महिला को अस्पताल लाया गया तो उजाला करने के लिए टॉर्च जलानी पड़ी। जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित इस अस्पताल में दो डॉक्टर, फार्मेसिस्ट और दो स्टाफ नर्स हैं।
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दो करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च कर अस्पताल का भवन बनवाया गया है, लेकिन संसाधन आज तक नहीं जुटाए गए। जबकि अस्पताल पर 79 ग्रामसभाओं के लोग निर्भर हैं।

अस्पताल की विद्युतापूर्ति घंटों ठप

power cut in government hospital.

मल्ला ओखलकांडा ब्लॉक के बगौर तोक निवासी मदन सिंह की पत्नी पूनम (20) पेड़ से चारा काटते वक्त मंगलवार की शाम गिरकर घायल हो गई। उसे अस्पताल लाया गया लेकिन तब अस्पताल में अंधेरा था, तीमारदारों ने पूछा तो पता चला कि अस्पताल की विद्युतापूर्ति सुबह से ठप है।

ड्यूटी में तैनात दोनों चिकित्सकों में से एक भी मौजूद नहीं था। चिकित्सकों की अनुपस्थिति में फार्मेसिस्ट अनिल कुमार गंगवार ने टॉर्च और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में घायल पूनम का प्राथमिक इलाज किया।

क्षेत्र के समाजसेवी दीपक बर्गली, जीवन कबडिया, हरेंद्र और दीवान सिंह आदि ने बताया कि अस्पताल का जेनरेटर भी तब चालू हुआ जब इलाज लगभग हो चुका था। बमुश्किल दस मिनट चलने के बाद जेनरेटर खुद ही बंद हो गया।

अस्पताल भवन नया बना है और उसमें अभी बिजली कनेक्शन नहीं लगा है। अस्थायी रूप से पुराने भवन से नए भवन में कनेक्शन लिया गया है। मगंलवार सुबह से अस्पताल में लाइट नहीं थी। जेनरेटर पुराने भवन में स्थित है जिसे चालू करने में कुछ समय लग जाता है। मरीज के पहुंचने के कुछ देर बाद जेनरेटर चालू कर दिया गया था।
- डॉ. जगदीप सिंह पटपटिया, प्रभारी चिकित्साधिकारी पीएचसी ओखलकांडा (नैनीताल)

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