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खुलासाः देश में 77% लोग रोज कमाते हैं 20 रुपए

Wed, 05 Nov 2014 09:29 AM IST
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा
दीप जोशी/ अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Wed, 05 Nov 2014 09:29 AM IST
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poverty graph increased in india.

जाने-माने समाजविज्ञानी और जेएनयू दिल्ली में समाजशास्त्र के प्रोफेसर डॉ. आनंद कुमार कहते हैं कि देश में कामकाजी लोगों में गरीबी का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है।

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अर्जुन सेन गुप्ता कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि देश में 77 फीसदी लोगों की कमाई औसतन 20 रुपए प्रतिदिन है।

स्थानीय स्तर पर शासन का प्रबंधन इतना भ्रष्ट हो चुका है कि निर्धन और दलित तबके को लाभ नहीं मिल रहा है। इसी कारण उग्रवाद और नक्सलवाद को बढ़ावा मिल रहा है।
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अमर उजाला से भेंट में प्रो. कुमार ने कहा कि विकास के नाम पर काफी बजट खर्च हो रहा है और लोगों की सुविधाओं और विकास के लिए अनेक कायदे कानून बने हैं, मगर स्थानीय स्तर पर शासन के कुप्रबंधन का कोई ‘इलाज’ नहीं है।

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150 जिले उग्रवाद, नक्सलवाद से प्रभावित

poverty graph increased in india.

कुप्रबंधन की वजह से आज भारत के 150 जिले उग्रवाद, नक्सलवाद से प्रभावित हैं।

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने यह भी कहा कि तमाम सतर्कताओं के बावजूद देश में मुसलमानों की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में खतरनाक गिरावट आई है। इससे भी अलगाववाद भड़क रहा है।

प्रो. कुमार ने न्यायमूर्ति जेएस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं में शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़े हैं लेकिन उनकी निजी मर्यादा पर खतरे भी बढ़े हैं।

इसी को देखते हुए समाजशास्त्रियों ने स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, वंचित वर्गों का विमर्श और पर्यावरण विमर्श में शोध की तरफ रुझान बढ़ाया है क्योंकि पारंपरिक ज्ञान ढांचे में इसका अभाव है।

वोट और धन संचय की प्रवृति बढ़ी

poverty graph increased in india.

समाज में यह देखा जा रहा है कि आम जनता से जुड़ी तमाम समस्याओं को लेकर लोग आगे नहीं आ रहे हैं और सिर्फ मीडिया पर ही सारे मुद्दे उठाने की जिम्मेदारी आ रही है।

प्रो. आनंद कुमार इसके लिए नेताओं और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार मानते हैं। कहते हैं नेताओं में वोट बैंक और धन संचय की प्रवृति बढ़ती जा रही है जो खतरनाक है।

ये राजनीतिक नेतृत्व में बढ़ते स्वार्थ का परिणाम है। जहां वोट नहीं है और नोट नहीं है उन मुद्दों पर नेता रुचि नहीं लेते। उन्हें या तो वोट चाहिए अथवा अपने या अपने दल के लिए नोट चाहिए।

ईमानदार के साथ जाने के बजाय नेता भ्रष्ट लोगों के साथ खड़े होते हैं क्योंकि उससे उन्हें नोट तो मिल ही जाते हैं।

वैकल्पिक राजनीति से ही बदलेंगे हालात

poverty graph increased in india.

देश के इन हालातों को बदलने के लिए वैकल्पिक राजनीति की जरूरत है। अच्छे लोगों का समाज में सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा इस सबमें शिक्षा और मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।  

राष्ट्रीय अधिवेशन 29 को वाराणसी में
समाजशास्त्रियों का अखिल भारतीय अधिवेशन 29 नवंबर को वाराणसी में होगा। समाजशास्त्री परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार ने बताया कि अधिवेशन का उद्घाटन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी करेंगे। उन्होंने बताया अधिवेशन का मुख्य विषय विकास, विविधता और लोकतंत्र रखा गया है।

इस अधिवेशन में देश में बढ़ रही गरीबी का मुद्दा प्रमुखता के उठाया जाएगा। और इसे काबू करने के लिए कारगर उपायों पर मंथन होगा।

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