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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड होटलों पर अब कसेगा शिकंजा
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Jun 2015 01:56 PM IST
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उत्तराखंड में प्रदूषण फैलाने वाले होटल अब उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निशाने पर रहेंगे। सभी बड़े होटलों के लिए बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी कर दिया गया है। 20 से अधिक कमरे वाले होटलों पर खास नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार और ऋषिकेश के अलावा देहरादून, मसूरी, नैनीताल आदि शहरों के कई नामी होटल भी प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। इन होटलों से निकलने वाला सीवरेज बेतरतीब ढंग से नदी, नालों में मिल रहा है। कई होटल वालों ने सीवरेज की निकासी खुले में भी की हुई है।
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तो कई होटलों में पानी गर्म करने और भोजन, मांस आदि बनाने के लिए कोयले की भट्टियां भी बनी हैं। इससे जल और वायु दोनों तरह का प्रदूषण बढ़ रहा है। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर हाल ही में हुए सर्वेक्षणों और शिकायतों पर बोर्ड ने इसका संज्ञान लिया है।
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प्रदेश के सभी होटल संचालकों को बोर्ड से प्रदूषण न फैलाने संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने को कहा गया है। बोर्ड ने अनापत्ति प्रमाण पत्र न लेने और मानकों का उल्लंघन करने वाले होटलों पर शिकंजा कसने की तैयारी भी कर दी है।
ये मानक करने होंगे पूरे
- अगर सीवर लाइन समीप है तो होटल के सीवरेज को सीधे सीवर लाइन में पहुंचाना पड़ेगा।
- होटल से सीवरेज कम निकलता है तो सेप्टिक टैंक बनाना होगा।
- होटल बड़ा है, सीवरेज ज्यादा निकलता है और सीवर लाइन भी नजदीक नहीं है तो होटल संचालक को अनिवार्य रूप से सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाना होगा।
होटल संचालकों को मानकों का पालन करने और बोर्ड से अनापत्ति लेने के लिए आवेदन करने को कहा गया है। अनापत्ति देने से पहले बोर्ड की टीम स्थलीय निरीक्षण करेगी। मानकों के विरुद्घ संचालित होने वाले होटलों पर कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद सिंघल, सदस्य सचिव, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड