हरक-हरीश के बीच सिमटी उत्तराखंड की सियासी जंग
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पांच माह से चल रही सियासी जंग अब भाजपा कांग्रेस नहीं दो नेताओं सीएम हरीश रावत और भाजपा नेता हरक सिंह पर केंद्रित हो गई है।
रेप कांड में घिरे हरक सिंह के खिलाफ आक्रामक होने की तैयारी में जुटी कांग्रेस के लिए पीड़िता के बदले बयान सीएम हरीश रावत की मुसीबतें बढ़ाते दिख रहे हैं। कांड को सीएम हरीश रावत और उनके करीबियों की साजिश बता पूरा मामला ही पलट दिया गया।
हार्स ट्रेडिंग के स्टिंग प्रकरण से बाहर निकलने में जुटे सीएम हरीश रावत एक बार फिर हरक सिंह के दांव से सियासी संकट में घिर गए हैं। सीबीआई जांच के बाद अब दिल्ली पुलिस भी रेप कांड के तार जोड़ने उत्तराखंड पहुंचेगी। उधर, इस दौरान सीएम के निशाने पर भी हरक ही दिखे। उनके करीबियों, रिश्तेदारों की कुर्सियां छीनने से लेकर भूमि संबंधित जांच में हरक को घेरा जा चुका है।
इस ताजा मामले के बाद आने वाले दिनों में हरक-हरीश के बीच सियासी जंग और बढ़ेगी।18 मार्च को विधानसभा के भीतर सीएम हरीश रावत और हरक सिंह में खींची तलवार के बाद से प्रदेश की सियासत इन्हीं दो धूरियों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है।
आठ साथी विधायकों के साथ हरक सिंह ने कांग्रेस का साथ छोड़ने का कारण कांग्रेस नहीं, बल्कि हरीश रावत को बताकर अपने सियासी मंसूबे साफ कर दिए थे। राष्ट्रपति शासन के दौरान दो बार स्टिंग आपरेशन हुआ, जिसमें सीधे तौर पर सीएम हरीश रावत ही उनके निशाने पर रहे। स्टिंग को आधार मानकर सीबीआई सीएम हरीश रावत के खिलाफ हार्स ट्रेडिंग की जांच भी कर रही है।
हरक सिंह के पैदा किए सियासी मुद्दों पर ही भाजपा कांग्रेस को घेरने की रणनीति बना रही है। भाजपा की सीनियर लीडरशिप ने इसकी शुरुआत पर्दाफाश रैली में स्टिंग आपरेशन को प्रचारित कर सीएम को घेरने की रणनीति तैयार की है। कांग्रेस ने भी हरक को घेरने के लिए उनके खिलाफ मुकदमे और जांचें खुलवा कर घेरने की चाल चली है।
हरक के करीबी अहम पदों से हटा दिए गए। इस बीच पांच दिन पहले हरक सिंह के रेप कांड में फंसते देख कांग्रेस ने बड़ी राहत महसूस की। कांग्रेस इस मामले को भाजपा के हरीश रावत को घेरने की रणनीति के खिलाफ इस्तेमाल करने की तैयारी कर चुकी थी कि अचानक बाजी एक बार फिर पलट गई। रेप कांड की पीड़िता ने हरक को क्लीक चिट देते हुए इसे हरीश रावत और उनके करीबियों के दबाव में बता दिया।
मामले में सच और झूठ से पर्दा तो न्यायालय से साबित होना है, लेकिन भाजपा अब इसे भुनाने की कोशिश करेगी। हरक सिंह की बदौलत भाजपा के सियासी तरकश में सजे तीरों में रैप कांड जुड़ने से कांग्रेस डिफेंसिव मोड में आने को मजबूर होगी। विधानसभा चुनाव को देखते हुए हरीश रावत के सामने भाजपा के हर आक्रमण का जवाब देने के लिए अपना कुनबा मजबूत करनने की मजबूरी होगी। फिलहाल हरीश रावत के लिए हरक से जूझना की चुनौती नहीं है, बल्कि मंत्रिमंडल विस्तार से खफा हुए कांग्रेस संगठन और कुछ वरिष्ठ नेता को साधने में भी उन्हें जोर लगाना पड़ेगा।
हरक - हरीश की जंग
- 18 मार्च को उत्तराखंड विधानसभा में हरीश रावत सरकार के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले 9 बागियों में हरक सिंह रावत अग्रणी रहे।
- 26 मार्च को सीएम हरीश रावत के विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर स्टिंग जारी हुआ
- 7 मई को हरक सिंह और विधायक मदन बिष्ट का हार्स ट्रेडिंग पर दूसरा स्टिंग जारी हुआ।
- 27 मई को सीएम ने हरक के खिलाफ विकासनगर में भूमि खरीद मामले में जांच खोली। वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने इस मामले की करवाई थी जांच।
- जून में हरक सिंह के रिश्तेदारों और करीबियों को कई अहम पदों से हटाया गया।
- 29 जुलाई को हरक सिंह पर असम की महिला ने रेप का आरोप लगाया। वर्ष 2003 में चर्चित हुए इस महिला के प्रकरण में ही हरक को मंत्री पद गंवाना पड़ा था।
- 2 अगस्त को हरक सिंह के खिलाफ एक बीज घोटाले के आरोपों की जांच को लेकर सरकार ने गठित की कमेटी।
- 3 अगस्त को आरोपी महिला ने बदला बयान। कहा- हरक को फंसाने में सीएम हरीश रावत का था उस पर दवाब।