उत्तराखंड में नहीं टूटे ये मिथक, मंत्रियों के अरमानों पर फिरा पानी
उत्तराखंड के नेता चुनाव में जीत और हार को लेकर कुछ मिथकों को बेहद खास मानते हैं। हालांकि हर बार वे इसे तोड़ने का प्रयास जरूर करते हैं लेकिन वे सफल नहीं हो पाते हैं।
उत्तराखंड सरकार में जो शिक्षा मंत्री बनेगा वह दुबारा विधायक नहीं बनेगा यह मिथक इस बार भी नहीं टूटा। हालांकि शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का दावा था कि इस बार वह यह मिथक तोड़ने जा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
देवप्रयाग से विनोद कंडारी ने शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी को पराजित किया। प्रदेश के विधानसभा चुनावों में प्रदेश सरकार के शिक्षा मंत्री और लगातार हारते आए हैं।
यह मिथक इस चुनाव में भी बरकरार रहा। वर्ष 2000 में भाजपा सरकार में तीरथ सिंह रावत शिक्षा मंत्री बने, लेकिन 2002 के चुनाव में वह विधानसभा नहीं पहुंच पाए। इसके बाद वर्ष 2002 में एनडी तिवारी सरकार में नरेंद्र सिंह भंडारी शिक्षा मंत्री बने, लेकिन वर्ष 2007 के चुनाव में वह चुनाव हार गए।
जबकि वर्ष 2007 में भाजपा सत्ता में आई, इस बार गोविंद सिंह बिष्ट और खजान दास शिक्षा मंत्री बने पर 2012 के चुनाव में वह भी हार गए। वर्ष 2012 में फिर कांग्रेस सरकार सत्ता में आई और देवप्रयाग से विधायक रहे मंत्री प्रसाद नैथानी को शिक्षा मंत्री बनाया गया, लेकिन शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी भी यह मिथक नहीं तोड़ पाए।
हर बार जिसकी सरकार, उसके पक्ष में गई चंपावत सीट
इस बार फिर मिथक बरकरार रहा। चंपावत विधानसभा सीट के वोटरों ने सत्तारूढ़ हुए दल का साथ दिया। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और यहां के वोटरों ने भी जमकर भाजपा को वोट दिए। ये लगातार चौथा मौका है, जब चंपावत सीट पर जनता ने उसी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया, जिसकी सरकार बनेगी।
गंगोत्री सीट की तरह ही चंपावत सीट का मिथक भी उत्तराखंड के अब तक के विधानसभा में अपराजय रहा। सूबे के चौथे चुनाव में भी यहां के मतदाताओं ने भाजपा का समर्थन किया और प्रदेश में सरकार भी भाजपा की बन रही है। चंपावत सीट से भाजपा उम्मीदवार कैलाश चंद्र गहतोड़ी ने कांग्रेस के प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल को पराजित किया।
गौरतलब है कि पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनी थी। तब चंपावत सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल ने निर्दलीय मदन सिंह महराना को महज 395 वोटों से शिकस्त दी थी, जबकि 2007 में हुए चुनाव में कांग्रेस को भारी अंतर से मुंह की खानी पड़ी। तब भाजपा प्रत्याशी बीना महराना ने कांग्रेस प्रत्याशी हेमेश खर्कवाल को 7058 वोटों से बुरी तरह हराया था और सरकार भी भाजपा की बनी। पिछले चुनाव में चंपावत से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। साथ ही सरकार भी कांग्रेस की बनी।