दो साल के भीतर 181 पुलिसकर्मियों की मौत, 10 कर चुके हैं आत्महत्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुलिस कर्मियों की नियमित स्वास्थ्य जांच और पहाड़ पर तैनाती से पहले मेडिकल कराने की तैयारी है। पुलिस कर्मियों की लगातार हो रही मौत को रोकने के लिए एसएसपी कार्मिक ने यह सुझाव दिया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो सालों में बीमारी की वजह से सबसे ज्यादा पुलिस कर्मियों ने जान गंवाई है।
पुलिस मुख्यालय ने दो साल में पुलिस कर्मियों की मौतों का आंकड़ा जुटाया था। मौत की वजह के जो आंकड़े सामने आए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले है। दो साल में कुल 181 पुलिसकर्मियों की मौत हुई, जिनमें से 101 पुलिसकर्मियों को बीमारी की वजह से जिंदगी से हाथ धोना पड़ा। सबसे ज्यादा 40 मामले हार्ट अटैक के हैं।
10 पुलिसकर्मी कर चुके हैं आत्महत्या
कैंसर और पीलिया की वजह से 22 की मौत हुई। लीवर खराब होने, किडनी फेल होने और फेफडे़ फेल होने की वजह से भी काफी मौतें हुई हैं। वहीं, करीब 10 पुलिस कर्मियों ने निराशा में जिंदगी डोर काट ली।
इसके अलावा 46 पुलिस कर्मियों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई। बीमारी से हो रही मौतों के मद्देनजर एसएसपी कार्मिक केवल खुराना ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिस पर अभी आला अफसरों की मंजूरी का इंतजार है।
एसएसपी कार्मिक केवल खुराना ने बताया कि पुलिस कर्मियों की मौत का आंकड़ा कम करने के लिए मेडिकल बोर्ड के गठन का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि संबंधित जिले में पुलिस कर्मियों को नियमित स्वास्थ्य परीक्षण हो सके। दूसरा पहाड़ जाने वाले पुलिस कर्मियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी जरूर कराया जाए, ताकि पहले ही उसकी बीमारी का ज्ञान हो सके।