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Dehradun News: जीडी से लेकर चार्जशीट सब ऑफलाइन, चक्कर काटते नजर आए विवेचक
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Iसाइबर हमला : तीन दिन से पुलिस के सभी ऑनलाइन काम को किया जा रहा है मैन्युअली
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Iतय समय पर चार्जशीट दाखिल करने के लिए दौड़ लगा रहे हैं विवेचना अधिकारीI
साइबर हमले के बाद वेबसाइट बंद होने से पुलिस का काम भी बढ़ गया है। फिलहाल ऑनलाइन व्यवस्थाओं को मैन्युअली किया जा रहा है। ऑनलाइन न जीडी चल रही और न ही एफआईआर। तय समय पर दाखिल होने वाली चार्जशीट के लिए भी तीन दिन से विवेचना अधिकारी संबंधित दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यही नहीं एक-दो दिन में सब चालू होने के बाद अब सबको ऑनलाइन करने में भी वक्त लग सकता है।
दरअसल, गत सात साल से पुलिस एफआईआर से लेकर चार्जशीट और अंतिम रिपोर्ट भी सीसीटीएनएस वेबसाइट के माध्यम से होती है। सभी थाने सीसीटीएनएस की वेबसाइट से जुड़े हैं। पुलिस अब पहले की तरह रजिस्टरों में तफ्तीश के पर्चे नहीं काटती। बल्कि इन पर्चों को भी ऑनलाइन ही फीड किया जाता है। सीओ ऑफिस में जाने वाली चार्जशीट और अंतिम रिपोर्ट को भी ऑनलाइन ही भेजा जाता है। ऐसे में अब ये सब काम तीन दिनों से मैन्युअली करने पड़ रहे हैं। एफआईआर को कंप्यूटर पर दर्ज किया जा रहा है लेकिन ऑनलाइन तभी होंगी जब सीसीटीएनएस ठीक से काम करने लग जाएगा।
सबसे अधिक समस्या तय समय पर दाखिल होने वाली चार्जशीट के संबंध में हो रही है। मसलन पॉक्सो के मामले में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। ऐसे में किसी मुकदमे में इन तीन दिनों में से कोई आखिरी दिन है तो इसके लिए विवेचना अधिकारी को सीओ ऑफिस दौड़ लगानी होगी। इसके बाद मैन्युअली ही इसे अप्रूव कर अभियोजन कार्यालय और फिर कोर्ट भेजा जा रहा है। रोज थानों की गतिविधियों को जीडी भी ऑनलाइन ही मेंटेन की जाती है। लेकिन, फिलहाल तीन दिनों से इसे भी मैन्युअली ही पहले की तरह भरा जा रहा है।
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Iट्रैफिक सिग्नल तीसरे दिन भी गड़बड़ाएI
शहर के कई सिग्नल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़े हुए हैं। भीड़ को देखकर खुद समय तय करने वाले इन सिग्नलों का भी सिस्टम गड़बड़ाया है। तीसरे दिन शनिवार को भी शहर की कुछ सिग्नल ने काम नहीं किया। ऐसे में पुलिसकर्मियों को मैन्युअली ही ट्रैफिक चलाना पड़ा। हालांकि, ज्यादातर ट्रैफिक सिग्नल मैन्युअली ही चलाए जाते हैं।
Iपुलिस के पास एकाएक आएगी जांच की बाढ़I
साइबर हमले के बाद सीएम हेल्पलाइन भी बंद हैं। सीएम हेल्पलाइन में जितनी भी शिकायतें हैं वह सब अटकी हुई हैं। ऐसे में सब कुछ ठीक होने के बाद पुलिस के पास एकाएक शिकायतों की बाढ़ आएगी। ऐसे में इनके निस्तारण में भी समय लगने की संभावना है।
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Iतय समय पर चार्जशीट दाखिल करने के लिए दौड़ लगा रहे हैं विवेचना अधिकारीI
साइबर हमले के बाद वेबसाइट बंद होने से पुलिस का काम भी बढ़ गया है। फिलहाल ऑनलाइन व्यवस्थाओं को मैन्युअली किया जा रहा है। ऑनलाइन न जीडी चल रही और न ही एफआईआर। तय समय पर दाखिल होने वाली चार्जशीट के लिए भी तीन दिन से विवेचना अधिकारी संबंधित दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यही नहीं एक-दो दिन में सब चालू होने के बाद अब सबको ऑनलाइन करने में भी वक्त लग सकता है।
दरअसल, गत सात साल से पुलिस एफआईआर से लेकर चार्जशीट और अंतिम रिपोर्ट भी सीसीटीएनएस वेबसाइट के माध्यम से होती है। सभी थाने सीसीटीएनएस की वेबसाइट से जुड़े हैं। पुलिस अब पहले की तरह रजिस्टरों में तफ्तीश के पर्चे नहीं काटती। बल्कि इन पर्चों को भी ऑनलाइन ही फीड किया जाता है। सीओ ऑफिस में जाने वाली चार्जशीट और अंतिम रिपोर्ट को भी ऑनलाइन ही भेजा जाता है। ऐसे में अब ये सब काम तीन दिनों से मैन्युअली करने पड़ रहे हैं। एफआईआर को कंप्यूटर पर दर्ज किया जा रहा है लेकिन ऑनलाइन तभी होंगी जब सीसीटीएनएस ठीक से काम करने लग जाएगा।
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सबसे अधिक समस्या तय समय पर दाखिल होने वाली चार्जशीट के संबंध में हो रही है। मसलन पॉक्सो के मामले में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। ऐसे में किसी मुकदमे में इन तीन दिनों में से कोई आखिरी दिन है तो इसके लिए विवेचना अधिकारी को सीओ ऑफिस दौड़ लगानी होगी। इसके बाद मैन्युअली ही इसे अप्रूव कर अभियोजन कार्यालय और फिर कोर्ट भेजा जा रहा है। रोज थानों की गतिविधियों को जीडी भी ऑनलाइन ही मेंटेन की जाती है। लेकिन, फिलहाल तीन दिनों से इसे भी मैन्युअली ही पहले की तरह भरा जा रहा है।
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Iट्रैफिक सिग्नल तीसरे दिन भी गड़बड़ाएI
शहर के कई सिग्नल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जुड़े हुए हैं। भीड़ को देखकर खुद समय तय करने वाले इन सिग्नलों का भी सिस्टम गड़बड़ाया है। तीसरे दिन शनिवार को भी शहर की कुछ सिग्नल ने काम नहीं किया। ऐसे में पुलिसकर्मियों को मैन्युअली ही ट्रैफिक चलाना पड़ा। हालांकि, ज्यादातर ट्रैफिक सिग्नल मैन्युअली ही चलाए जाते हैं।
Iपुलिस के पास एकाएक आएगी जांच की बाढ़I
साइबर हमले के बाद सीएम हेल्पलाइन भी बंद हैं। सीएम हेल्पलाइन में जितनी भी शिकायतें हैं वह सब अटकी हुई हैं। ऐसे में सब कुछ ठीक होने के बाद पुलिस के पास एकाएक शिकायतों की बाढ़ आएगी। ऐसे में इनके निस्तारण में भी समय लगने की संभावना है।