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'उत्तराखंड पुलिस ने फाड़े महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े'

Mon, 08 Jun 2015 11:58 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, श्रीनगर
ब्यूरो / अमर उजाला, श्रीनगर Updated Mon, 08 Jun 2015 11:58 AM IST
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police torn clothes of female protester in maletha.

उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल स्थित मलेथा में लाठीचारे्ज के विरोध में आंदोलनकारियों ने कीर्तिनगर कोतवाली का घेराव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं के कपड़े फाड़े।

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रविवार को दोषी पुलिस कर्मियों का निलंबन नहीं होने पर उग्र प्रदर्शन की चेतावनी दी। इधर, पुलिस ने लाठीचार्ज की घटना से इनकार किया है। शनिवार रात करीब आठ बजे पुलिस ने 13 दिन से आमरण अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को जबरन उठा लिया था।
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इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों की बीच हुई धक्का-मुक्की में दोनों पक्ष के लोगों को चोटें आई हैं। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस की ओर से किए गए लाठीचार्ज से हिमालय बचाओ आंदोलन के नेता समीर रतूड़ी सहित 10 महिलाओं को चोटें आई। महिलाओं के कपड़े भी फाड़े गए।

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ज्ञापन भेजने के साथ कोतवाली का घेराव

police torn clothes of female protester in maletha.

घटना से आक्रोशित आंदोलनकारियों ने शनिवार रात आठ से दो बजे तक बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जाम रखा। रविवार को मलेथा आंदोलन स्थल पर सभा के बाद आंदोलनकारियों ने कीर्तिनगर में जुलूस-प्रदर्शन किया।

एसडीएम के माध्यम से डीएम को ज्ञापन भेजने के साथ ही उन्होंने कोतवाली का घेराव किया। यहां उन्होंने पुलिस, प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी आदेश के आंदोलनकारियों को पीटा। यही नहीं महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार भी किया गया है। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व विमला देवी, देव सिंह और सीता देवी आदि कर रहे थे।

वहीं, कोतवाली में पहुंचे टिहरी के पुलिस क्षेत्राधिकारी प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि आंदोलनकारी महिला को उठाना जरूरी था। अंधेरे में हल्की धक्का-मुक्की हुई है, लेकि लाठीचार्ज नहीं किया गया है।

समीर और बिष्ट बैठे अनशन पर

श्रीनगर मलेथा में स्टोन क्रशर के विरोध में 13 दिनों से अनशन पर बैठी हेमंती नेगी को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद हिमालय बचाओ आंदोलन के नेता समीर रतूड़ी और ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट अनशन पर बैठ गए हैं।

रतूड़ी ने घोषणा की है कि दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक वह जल भी ग्रहण नहीं करेंगे। रतूड़ी इससे पहले भी स्टोन क्रशरों के विरोध में आमरण अनशन कर चुके हैं।

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