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दिवंगत सिपाही के आश्रित बन सकेंगे बाबू
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 21 Feb 2017 12:59 PM IST
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- फोटो : demo pic
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ड्यूटी के दौरान प्राण न्यौछावर करने वाले दिवंगत सिपाही की पत्नी अथवा आश्रित अब पुलिस महकमे में बाबू भी बन सकेंगे। इसके लिए स्नातक की डिग्री और एक साल का कंप्यूटर कोर्स जरूरी होगा।
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अब तक आश्रितों को पीएसी में ही कांस्टेबल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियुक्ति मिलती है। पुलिस स्थापना समिति ने आश्रितों को दिवंगत सिपाही के ही सेक्शन में तैनाती को भी हरी झंडी दे दी है।
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उत्तराखंड पुलिस महकमे में सिविल, आर्म्ड, फायर आदि सेक्शनों के दिवंगत जवानों की पत्नी या आश्रितों को अब तक पीएसी में ही कांस्टेबल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में ज्वाइनिंग दी जाती थी। कांस्टेबल पद पर भर्ती के लिए इंटर पास के साथ फिजिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य था।
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अन्यथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद पर नियुक्ति मिलती थी। आश्रितों की भर्ती से पीएसी में कर्मचारियों की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई। इस कारण आश्रितों को दिवंगत जवान के संबंधित सेक्शन विभाग में तैनाती देने पर विचार चल रहा था। ऐसे ही दिवंगत जवान की पत्नी को मिनिस्ट्रीयल संवर्ग में तैनाती की बात उठने लगी थी।
पुलिस स्थापना समिति की बैठक में इन दोनों मसलों पर गहनता से मंथन कर फैसले लिए गए। अब दिवगंत सिपाही के आश्रित को उसी सेक्शन में तैनाती मिलेगी, जिसमें वह पोस्ट था। उदाहरण के तौर पर यदि कोई जवान सिविल पुलिस में था, तो वहीं कांस्टेबल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में तैनाती मिलेगी।
इस बार पत्नी अथवा आश्रितों के लिए एक और विकल्प बढ़ाया गया है। स्नातक और एक साल का कंप्यूटर कोर्स करने वाले आश्रित पुलिस विभाग में बाबू बन सकेंगे।
दिवंगत सिपाही की पत्नी अथवा आश्रितों को अब पुलिस विभाग के मिनिस्ट्रीयल संवर्ग में तैनाती मिलेगी। इसके लिए स्नातक होने के साथ एक साल का कंप्यूटर कोर्स अनिवार्य रखा गया है। पुलिस स्थापना समिति का यह फैसला लागू कर दिया गया है।
- राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था