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तकनीक के दौर में अपने मुखबिरों को न भूले पुलिस : अमित शाह
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अपराधियों से लड़ने के लिए तकनीक बेहद जरूरी है, लेकिन तकनीक के इस दौर में पुलिस को अपने मुखबिरों को नहीं भूलना चाहिए। इसके लिए पुलिस को चाहिए कि वह बीट को जिंदा करे, परेड को नियमित करे और खबरियों को पुनर्जीवित करे।
गृहमंत्री शनिवार को भारतीय अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में 49वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस के उद्घाटन पर बोल रहे थे। उन्होंने देश से आतंकवाद के खात्मे के लिए पुलिस को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री ने इससे पहले सीआईआई की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। वह कई स्टॉल पर गए और पुलिस के लिए जरूरी उपकरणों को देखकर उनके बारे में जानकारी ली। उन्होंने एफआरआई के दीक्षांत सभागार में देशभर के पुलिस अधिकारियों को संबोधित किया।
गृहमंत्री ने कहा कि देश की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार बहुत से काम कर रही है। इसके लिए नई-नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को चलाने के लिए अधिकतर काम अब ऑनलाइन किया जा रहा है। फिर वह थानों को जोड़ने वाला सीसीटीएनएस हो, ई-कोर्ट हो या ई-फॉरेंसिक। इससे पुलिस का काम बहुत आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि काउंटर टेररिज्म में जीरो टॉलरेंस स्ट्रेटेजी और जीरो टॉलरेंस एक्शन को आगे बढ़ाते हुए देश से आतंकवाद को जड़ से खत्म करना होगा।
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उन्होंने कहा कि राज्यों की पुलिस अन्य सभी सुरक्षा एजेंसी से बेहतर तालमेल बनाए। राष्ट्रीय रक्षा शक्ति विवि और फॉरेंसिक साइंस विवि से पुलिस अपने आप को जोड़े रखे। देश 25 साल बाद आजादी की शताब्दी मना रहा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस वक्त तक देश को हर क्षेत्र में आगे रखने का संकल्प लिया है। यह तभी संभव है जब देश में कानून का राज होगा। तभी आर्थिकी के क्षेत्र में भी अवसर बनेंगे और अन्य क्षेत्रों में भी भय मुक्त माहौल होने के चलते सब काम आसान होगा।
देश के तीनों हॉट स्पॉट में कानून व्यवस्था पहले से बेहतर
गृहमंत्री ने देश के हिंसा के लिहाज से तीन हॉट स्पॉट का भी जिक्र किया। इनमें उन्होंने जम्मू कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्य और वामपंथी उग्रवाद से ग्रसित क्षेत्रों की स्थिति को बताया। उन्होंने कहा कि इन तीनों हॉट स्पॉट में आज कानून व्यवस्था यूपीए के दोनों कार्यकाल से बेहतर स्थिति में है। यूपीए के नौ वर्ष के भीतर इन क्षेत्रों में 33 हजार से अधिक हिंसक घटनाएं हुई थीं। जबकि, मौजूदा सरकार के नौ वर्षों में इन तीनों हॉट स्पॉट में केवल 12 हजार से कुछ अधिक हिंसक घटनाएं हुई हैं। इनमें आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ते हुए यूपीए के नौ सालों में 11447 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। जबकि, मौजूदा सरकार के नौ वर्षो में यह आंकड़ा इससे बेहद कम 3240 है।
तारीख पर तारीख से बदनाम नहीं होने देंगे न्याय प्रणाली
गृहमंत्री ने कहा कि अब तक देश की न्याय प्रणाली तारीख पर तारीख के चलते बदनाम थी। कोई भी काम समय पर नहीं होता था। इससे अपराधियों को सजा और पीड़ित को न्याय देर से मिलता था। यह सब अंग्रेजों के जमाने के तीन महत्वपूर्ण कानूनों आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट में बदलाव न होने के कारण था। मगर सरकार ने अब इसकी भी शुरुआत कर दी है। क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के लिए जरुरी इन तीनों कानूनों में अमूलचूल बदलाव किया जा रहा है। इससे सभी काम तेजी से होंगे। फाेरेंसिक साइंस की भूमिका को और अधिक प्रभावी किया गया है।
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गृहमंत्री शनिवार को भारतीय अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) में 49वीं ऑल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस के उद्घाटन पर बोल रहे थे। उन्होंने देश से आतंकवाद के खात्मे के लिए पुलिस को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया। केंद्रीय गृहमंत्री ने इससे पहले सीआईआई की ओर से आयोजित प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। वह कई स्टॉल पर गए और पुलिस के लिए जरूरी उपकरणों को देखकर उनके बारे में जानकारी ली। उन्होंने एफआरआई के दीक्षांत सभागार में देशभर के पुलिस अधिकारियों को संबोधित किया।
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गृहमंत्री ने कहा कि देश की कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार बहुत से काम कर रही है। इसके लिए नई-नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है। क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को चलाने के लिए अधिकतर काम अब ऑनलाइन किया जा रहा है। फिर वह थानों को जोड़ने वाला सीसीटीएनएस हो, ई-कोर्ट हो या ई-फॉरेंसिक। इससे पुलिस का काम बहुत आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि काउंटर टेररिज्म में जीरो टॉलरेंस स्ट्रेटेजी और जीरो टॉलरेंस एक्शन को आगे बढ़ाते हुए देश से आतंकवाद को जड़ से खत्म करना होगा।
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उन्होंने कहा कि राज्यों की पुलिस अन्य सभी सुरक्षा एजेंसी से बेहतर तालमेल बनाए। राष्ट्रीय रक्षा शक्ति विवि और फॉरेंसिक साइंस विवि से पुलिस अपने आप को जोड़े रखे। देश 25 साल बाद आजादी की शताब्दी मना रहा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस वक्त तक देश को हर क्षेत्र में आगे रखने का संकल्प लिया है। यह तभी संभव है जब देश में कानून का राज होगा। तभी आर्थिकी के क्षेत्र में भी अवसर बनेंगे और अन्य क्षेत्रों में भी भय मुक्त माहौल होने के चलते सब काम आसान होगा।
देश के तीनों हॉट स्पॉट में कानून व्यवस्था पहले से बेहतर
गृहमंत्री ने देश के हिंसा के लिहाज से तीन हॉट स्पॉट का भी जिक्र किया। इनमें उन्होंने जम्मू कश्मीर, उत्तर पूर्वी राज्य और वामपंथी उग्रवाद से ग्रसित क्षेत्रों की स्थिति को बताया। उन्होंने कहा कि इन तीनों हॉट स्पॉट में आज कानून व्यवस्था यूपीए के दोनों कार्यकाल से बेहतर स्थिति में है। यूपीए के नौ वर्ष के भीतर इन क्षेत्रों में 33 हजार से अधिक हिंसक घटनाएं हुई थीं। जबकि, मौजूदा सरकार के नौ वर्षों में इन तीनों हॉट स्पॉट में केवल 12 हजार से कुछ अधिक हिंसक घटनाएं हुई हैं। इनमें आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ते हुए यूपीए के नौ सालों में 11447 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। जबकि, मौजूदा सरकार के नौ वर्षो में यह आंकड़ा इससे बेहद कम 3240 है।
तारीख पर तारीख से बदनाम नहीं होने देंगे न्याय प्रणाली
गृहमंत्री ने कहा कि अब तक देश की न्याय प्रणाली तारीख पर तारीख के चलते बदनाम थी। कोई भी काम समय पर नहीं होता था। इससे अपराधियों को सजा और पीड़ित को न्याय देर से मिलता था। यह सब अंग्रेजों के जमाने के तीन महत्वपूर्ण कानूनों आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट में बदलाव न होने के कारण था। मगर सरकार ने अब इसकी भी शुरुआत कर दी है। क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के लिए जरुरी इन तीनों कानूनों में अमूलचूल बदलाव किया जा रहा है। इससे सभी काम तेजी से होंगे। फाेरेंसिक साइंस की भूमिका को और अधिक प्रभावी किया गया है।