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पुलिसकर्मियों के परिजन के कंधों पर ‘मिशन आक्रोश’
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 24 Aug 2015 10:19 AM IST
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वेतन विसंगति के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस का ‘मिशन आक्रोश’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। डीजीपी के भावनात्मक संबोधन पर रविवार को पुलिकर्मियों में बहस होती रही।
कोई डीजीपी पर भरोसा करने तो कोई आरपार की लड़ाई को तैयार दिखा। वहीं 31 अगस्त को परिजनों के परेड ग्राउंड कूच की बात पर एक ओर जहां पुलिसकर्मी मंथन करते रहें, वहीं दूसरी ओर आईजी के निर्देश पर थाने और चौकियों में आक्रोश पर मरहम लगाने की कवायद चलती रही।
डीजीपी बीएस सिद्धू ने वेतन विसंगति को लेकर पुलिस में उठे विरोध के स्वर को दबाने के लिए शनिवार को 18 मिनट का संबोधन किया था, जिसमें पुलिसकर्मियों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने 31 दिसंबर तक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान न होने पर पद छोड़ने की भी बात कही थी।
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यह बात अलग है कि डीजीपी अगले साल अप्रैल में रिटायर्ड हो रहे हैं। डीजीपी के बयान को लेकर दिन भी पुलिस विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। यह भी कहा गया कि डीजीपी के हाथ में यह मामला अब नहीं है।
कुछ पुलिसकर्मी समय देने की वकालत करते रहे तो कुछ आंदोलन की अलख जगाने के समर्थन में रहे। बहस के बीच 31 अगस्त के परिजनों के परेड ग्राउंड कूच को लेकर भी चरचा होती रही। सोशल साइट्स पर भी कहा गया है कि पुलिसकर्मी अपने परिवार के बुजुर्गों को आंदोलन के लिए तैयार करें, उन्हें आगे कर संघर्ष को तेज किया जाए।
परस्पर विरोधी बयानों को लेकर हलचल
प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत, मुख्य सचिव राकेश शर्मा, डीजीपी बीएस सिद्दू और आईजी संजय गुंज्याल के परस्पर विरोधी बयानों पर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित खबर पर भी रविवार को हलचल रही।
अधिकारियों में यह मुद्दा गरमाया रहा। वहीं पुलिस कर्मचारियों में यह बात चर्चाओं में रही कि अधिकारियों में खुद ही तालमेल नहीं है।
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कोई डीजीपी पर भरोसा करने तो कोई आरपार की लड़ाई को तैयार दिखा। वहीं 31 अगस्त को परिजनों के परेड ग्राउंड कूच की बात पर एक ओर जहां पुलिसकर्मी मंथन करते रहें, वहीं दूसरी ओर आईजी के निर्देश पर थाने और चौकियों में आक्रोश पर मरहम लगाने की कवायद चलती रही।
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डीजीपी बीएस सिद्धू ने वेतन विसंगति को लेकर पुलिस में उठे विरोध के स्वर को दबाने के लिए शनिवार को 18 मिनट का संबोधन किया था, जिसमें पुलिसकर्मियों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश की थी। उन्होंने 31 दिसंबर तक कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान न होने पर पद छोड़ने की भी बात कही थी।
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यह बात अलग है कि डीजीपी अगले साल अप्रैल में रिटायर्ड हो रहे हैं। डीजीपी के बयान को लेकर दिन भी पुलिस विभाग में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। यह भी कहा गया कि डीजीपी के हाथ में यह मामला अब नहीं है।
कुछ पुलिसकर्मी समय देने की वकालत करते रहे तो कुछ आंदोलन की अलख जगाने के समर्थन में रहे। बहस के बीच 31 अगस्त के परिजनों के परेड ग्राउंड कूच को लेकर भी चरचा होती रही। सोशल साइट्स पर भी कहा गया है कि पुलिसकर्मी अपने परिवार के बुजुर्गों को आंदोलन के लिए तैयार करें, उन्हें आगे कर संघर्ष को तेज किया जाए।
परस्पर विरोधी बयानों को लेकर हलचल
प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत, मुख्य सचिव राकेश शर्मा, डीजीपी बीएस सिद्दू और आईजी संजय गुंज्याल के परस्पर विरोधी बयानों पर अमर उजाला की ओर से प्रकाशित खबर पर भी रविवार को हलचल रही।
अधिकारियों में यह मुद्दा गरमाया रहा। वहीं पुलिस कर्मचारियों में यह बात चर्चाओं में रही कि अधिकारियों में खुद ही तालमेल नहीं है।