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नामांकन में शस्त्र का प्रदर्शन सुरक्षा में बड़ी चूक
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 29 Jan 2017 11:06 AM IST
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पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार में नामांकन प्रक्रिया के दौरान शस्त्र प्रदर्शन को सुरक्षा में बड़ी खामी माना गया है। डीआईजी की रिपोर्ट पुलिस की घोर लापरवाही पर मुहर लगाती हैं। आखिर पुलिस कैसी ड्यूटी कर रही थी, जो शस्त्र मीडिया के कैमरों में तो आ गया, लेकिन पुलिस कर्मियों को नजर नहीं आया।
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आचार संहिता उल्लंघन का यह मामला उजागर होने के बाद भी शस्त्र जब्त न करना पुलिस अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठाता है। वो भी उस स्थिति में जब एसएसपी राजीव स्वरूप पर पूर्व विधायक चैंपियन से संबंध निभाने के आरोप लगते रहे हैं। उधर पुलिस मुख्यालय भी उनकी कार्यशैली से खफा था। उनके कई ऐसे आदेश रहे हैं, जो मुख्यालय को बदलने पड़े।
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उत्तराखंड के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई आईपीएस अधिकारी चुनाव आयोग की नजर में खटका है।
कप्तान राजीव स्वरूप की कार्यशैली की शिकायत तो आचार संहिता लागू होने के बाद से हो रही थी। कलेक्ट्रेट में नामांकन के दौरान एक बड़ी चूक उनकी कप्तानी को दागदार कर गई, जिसे मिटाना इतना आसान नहीं होगा। पुलिस उप महानिरीक्षक पुष्पक ज्योति ने पुलिस की लापरवाही की तथ्यपरक रिपोर्ट दी है, जो सीधे तौर पर जिला पुलिस नेतृत्व को अक्षम ठहराने वाली है। डीआईजी ने पूरी रिपोर्ट हरिद्वार का भ्रमण कर तैयार की है, जिसमें बिंदुवार पुलिस कमियों को उजागर किया गया है।
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सूत्रों की माने तो आचार संहिता लागू होने के बाद लाइसेंसी शस्त्र लेकर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित था। बावजूद इसके लिए पुलिस सुरक्षा के बीच प्रत्याशी का समर्थक लाइसेंसी रायफल लहराता रहा। सुरक्षा में यह बड़ी चूक से कम नहीं है। इस लापरवाही के बाद भी शस्त्र को जब्त करने में दिलचस्पी ना दिखाना कार्रवाई का बड़ा कारण बन गया। इससे पहले भी राजीव स्वरूप खुद को विवादों से दूर नहीं कर पाए।
फेल बताकर पहली बार हटाने के बाद उनकी दूसरी तैनाती पर खुद पुलिस मुख्यालय ने सवाल उठाए है। राजनैतिक नेताओं की पसंद के चलते उनकी ताजपोशी हुई। लंढौरा कांड में भी विभागीय स्तर पर पुलिस पर सवाल उठे थे। डीजीपी के हस्तक्षेप के बाद थानेदारों के तबादलों और पुलिस कर्मियों को सिविल से आर्म्ड पुलिस में करने जैसे आदेश आईजी संजय गुंज्याल को बदलवाने पड़े थे।