केदारनाथ: पीएम मोदी के स्वागत के लिए तैयार बाबा केदार का धाम, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
PM Narendra Modi Kedarnath Visit: रुद्रा प्वाइंट से केदारनाथ मंदिर और ध्यान गुफा समेत गरुड़चट्टी क्षेत्र तक सुरक्षा को लेकर पुलिस, पीएससी समेत अन्य सुरक्षा फोर्स के जवानों को मुस्तैद किया जा रहा है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केदारनाथ भ्रमण के लिए केदारपुरी तैयार हो चुकी है। शासन, प्रशासन व विभागीय अधिकारी अपनी ड्यूटी के लिए धाम पहुंच चुके हैं। आज 4 नवंबर को मुख्य सचिव व गढ़वाल आयुक्त द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंधक किए गए हैं। साथ ही केदारपुरी के चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी की नजर भी रहेगी। इसकी जिला कार्यालय समेत मुख्यमंत्री कार्यालय से मॉनीटरिंग की जा रही है।
रुद्रा प्वाइंट से केदारनाथ मंदिर और ध्यान गुफा समेत गरुड़चट्टी क्षेत्र तक सुरक्षा को लेकर पुलिस, पीएससी समेत अन्य सुरक्षा फोर्स के जवानों को मुस्तैद किया जा रहा है। साथ ही गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच भी पड़ावों व अन्य चिह्नित स्थानों पर जवान तैनात किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी मनुज गोयल ने बताया कि केदारनाथ में मंदिर मार्ग पर बैरिकेडिंग की जा चुकी है। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुबह 7.45 बजे से पूर्वाह्न 11.30 बजे के मध्य है।
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इस दौरान यात्री, बाबा केदार के दर्शन नहीं कर सकेंगे। साथ ही केदारघाटी से केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर का संचालन भी बंद रहेगा। पैदल मार्ग पर भी यात्रियों को पड़ावों पर तय समय तक रोका जाएगा। पुलिस अधीक्षक आयुष अग्रवाल ने बताया कि शासन के निर्देश पर सभी आला अधिकारी केदारनाथ पहुंच चुके हैं।
आदिगुरु शंकराचार्य की मूर्ति का लोकार्पण करेंगे पीएम
केदारनाथ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ड्रीम प्रोजेक्ट केदारनाथ पुनर्निर्माण में सबसे खास आदिगुरु शंकराचार्य समाधि स्थल के पुनर्निर्माण के लोकार्पण के साथ ही मूर्ति का अनावरण भी करेंगे। केदारनाथ में मंदिर के पीछे मंदाकिनी नदी किनारे आदिगुरु शंकराचार्य की कुटीर (समाधि स्थल) का निर्माण किया गया है।
नवंबर 2019 में तीन चरणों में यह कार्य शुरू किया गया था। दो चरण का काम पूरा हो चुका है। कार्यदायी संस्था वुड स्टोन कंपनी के टीम प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि समाधि का निर्माण 36 मीटर गोलाकार में किया गया है जिसकी गहराई छह मीटर है। अब, समाधि तक प्रवेश व निकासी के लिए अलग-अलग 3 मीटर चौड़े व 40 मीटर लंबे दो रास्तों का निर्माण किया जाना है। गौरतलब है कि 2013 की आपदा में केदारनाथ में आदिगुरु शंकराचार्य का समाधिस्थल और उनकी मूर्ति मंदाकिनी नदी के सैलाब में तबाह हो गई थी।