पूरा नहीं हुआ पीएम मोदी का उद्देश्य, यहां आज भी 400 सिगरेटों का धुआं पी रहीं महिलाएं
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देहरादून के लोहिया नगर निवासी सुनिता का परिवार मजदूरी करता है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन मिला। इसके बाद उन्होंने चूल्हा छोड़कर एलपीजी पर खाना बनाना शुरू कर दिया। लेकिन सिलिंडर खत्म होने के बाद उन्होंने दोबारा नहीं भरवाया और फिर से चूल्हे पर ही खाना बना रहीं हैं।
न्यू कैंट रोड स्थित चुक्खु मौहल्ला निवासी पूजा के पति सब्जी का ठेला लगाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह हर माह गैस सिलिंडर भरवा सकें। इसलिए योजना के बाद से खाली पड़ा सिलिंडर वैसी ही स्थिति में रखा हुआ है। एक बार उसे भरवाने की सोची भी लेकिन कीमत सुनकर इरादा बदल दिया। अब परिवार फिर चूल्हे पर ही खाना बना रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन महिलाओं को चूल्हे के धुएं से निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना शुरू कर मुफ्त गैस कनेक्शन बांटे, उनकी हालत जस की तस बनी हुई हैं। बकौल प्रधानमंत्री वह महिलाएं आज भी रोजाना चार सौ सिगरेट का धुआं पीने को मजबूर हैं। योजना के तहत उन्हें जो गैस सिलिंडर दिए गए, एक बार खाली होने के बाद उन्हें भरवाया ही नहीं गया। इसके चलते वह महिलाएं आज भी चूल्हे पर ही खाना बना रहीं हैं।
2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने किया था प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का शुभारंभ
एक मई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाय) का शुभारंभ किया था। इसका मकसद खाना पकाने के लिए उपयोग में आने वाले लकड़ी, कंडे या केरोसिन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देना था। जिससे महिलाओं को धुएं से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।
योजना के तहत उत्तराखंड में लगभग 2.82 लाख गरीब परिवारों को योजना का लाभ दिया गया। देहरादून में पात्रता के दायरे में आने वाले 33 हजार सात सौ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन आवंटित किए गए। दावे किए गए कि अब महिलाओं को चूल्हे के धुएं से निजात मिलेगी और वह धुआं मुुक्त खाना पका पाएंगी।
लेकिन लाभार्थियों को जो सिलिंडर दिए गए, उनमें से ज्यादातर खाली होने के बाद वैसे ही पड़े हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार केवल 20 फीसदी सिलिंडरों की ही रिफिलिंग की जा रही है। 33 हजार सात सौ कनेक्शन में से मात्र छह हजार सात सौ चालीस कनेक्शन ही ऐसे हैं जो दो से तीन माह में एक बार रिफिल किए जाते है। इसके अलावा 26 हजार 960 कनेक्शन आज तक डंप पडे़ हुए हैं।
बढ़ते दाम प्रमुख कारण
अमर उजाला ने क्षेत्र में पहुंचकर इसकी पड़ताल की तो पता चला कि एक तो सिलिंडर की कीमत बढ़कर 900 रुपये पहुंच गई है और एक साल तक सिलेंडर की सब्सिडी भी खाते में नहीं आने के चलते उपभोक्ता रिफिलिंग कराने से परहेज कर रहे हैं। दो से तीन हजार रुपये महीने में परिवार का गुजारा करने वाले गरीब परिवारों की माने तो 900 रुपये की गैस खरीदने पर पूरे महीने का बजट बिगड़ जाता है। यही वजह है कि मुफ्त कनेक्शन मिलने के बावजूद लाभार्थी चूल्हे के धुएं में ही रोटियां सेकने को मजबूर है।
योजना के सिलिंडरों को दोबारा न भरे जाने का प्रमुख कारण कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी को माना जा रहा है। ज्यादातर लाभार्थियों ने बताया कि सिलिंडर की कीमत हर महीने बढ़ रही है। शुरूआत में सिलिंडर के लिए बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है, जिसके काफी दिन बाद सब्सिडी का पैसा खाते में वापस आता है। ऐसे में गरीब परिवार के लिए सिलिंडर की धनराशि का इंतजाम करना खासा मुश्किल होता है।
उज्ज्वला के तहत मुफ्त में गैस कनेक्शन तो बांट दिए, लेकिन अब स्थिति ये है कि इन कनेक्शनों की मात्र 20 प्रतिशत ही रिफिलिंग होती हैं।
- चमन लाल, अध्यक्ष, एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स वेलफेयर एसोसिएशन
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी यदि सिलिंडर की रिफिलिंग नहीं करा पा रहे, तो वह एजेंसी पर जाकर 14 किलो का सिलिंडर पांच किलो वाले सिलिंडर से बदल सकते हैं।
- सुधीर कश्यप मार्केटिंग मैनेजर, आइओसी