ऋषिकेश में आयोजित हो रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2017 के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए साधकों से रूबरू हुए। बता दें कि महोत्सव में 93 देशों के एक हजार से अधिक साधक पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों ने विभिन्न मिसाइलों का निर्माण कर उसका सफल परीक्षण कर कुशल वैज्ञानिक होने की मिशाल पेश की। उसी प्रकार योग के जरिए भी एक समर्थ भारत बनाने की दिशा में बढ़ेंगे और योग के लिए तीर्थनगरी के अलावा दूसरा कोई उचित विकल्प नहीं हो सकता है। यह वह स्थान है जहां गंगा तट पर देश विदेश के योगी, महात्मा और संत पहुंचते हैं।
93 देशों के साधकों से मिले PM मोदी तो सब चिल्लाने लगे 'वी लव मोदी'
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प्रधानमंत्री ने महान विचारक मैक्समूलर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ही एक ऐसा देश है जहां सबसे ज्यादा मस्तिष्क का विकास हो सकता है और मानसिक समस्याओं का समाधान भी वहीं मिलता है। सबसे सफल व्यक्ति जिन्हें आत्म साक्षात्कार हुआ वह भारत में ही संभव हो पाया है। मोदी ने कहा कि योग व्यक्तियों को जोड़ने का विधान है। परिवार, समाज, साथी, के साथ एकता ही योग है।
शक्ति से सीमिति तक, मैं से हम तक, अहम से वयम तक का भाव विस्तार ही योग है। यह शक्ति आत्मा एवं मन की भावना तक की यात्रा है। योग को मात्र शरीर को चुस्त रखने तक ही सीमित रखना उचित नहीं है। इससे शांति, सांत्वना, संतोष प्राप्त होता है। उन्होंने कहा विश्व आज दो मुख्य समस्याओं का सामना कर रहा है।
आतंकवाद एवं जलवायु परिवर्तन। इसके लिए दुनिया भारत की ओर योग की ओर शाश्वत समाधान पाने के लिए देख रही है। उन्होंने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के प्रयासों से निर्मित हिंदू विश्वकोष को विश्व की अमूल्य धरोहर और विश्व की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जब इसका अनुवाद विश्व की दूसरी भाषाओं में होगा तो देश में जागरूकता का व्यापक प्रसार होगा।
आयुष मंत्रालय भारत सरकार, उत्तराखंड पर्यटन विकास बोर्ड, एवं गढ़वाल मंडल विकास निगम और परमार्थ निकेतन आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 29 वां सात दिवसीय अंतराष्ट्रीय योग महोत्सव 2017 के बृहस्पतिवार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से साधकों से रूबरू हुए। दोपहर एक बजे से 1:25 तक चले 25 मिनट के संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि परमार्थ निकेतन द्वारा किए जा रहे स्वच्छता, जल एवं नदी संरक्षण और हरितिमा संवर्धन को कार्यों के प्रति उत्सुकता प्रकट की। इस मौके पर साध्वी भगवती सरस्वती, प्रेमबाबा, पद्मश्री भारत भूषण, सुर्येंदुपुरी, मोहन भंडारी, स्वामिनी आभा सरस्वती, भीक्खू सग्सेना, सीएम भंडारी, लॉरा प्लम्स और स्वामी शंकराचार्य आदि मौजूद थे।